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आत्मविश्वास और हौसले से सामाजिक मिथक तोड़ परिवार का संबल बन रहीं बेटियां

inspiring society नरसिंहपुर. बदलते समय के साथ जिले की बेटियां अपने आत्मविश्वास, मेहनत और हौसले के दम पर सामाजिक मिथकों को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम कर रही हैं। शिक्षा, खेल और रोजगार के क्षेत्र में वे न केवल अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अपने संघर्ष और सफलता से समाज को भी प्रेरित कर […]

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बदलते समय के साथ जिले की बेटियां अपने आत्मविश्वास, मेहनत और हौसले के दम पर सामाजिक मिथकों को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम कर रही हैं। शिक्षा, खेल और रोजगार के क्षेत्र में वे न केवल अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अपने संघर्ष और सफलता से समाज को भी प्रेरित कर रही हैं

निशा साहू।

inspiring society नरसिंहपुर. बदलते समय के साथ जिले की बेटियां अपने आत्मविश्वास, मेहनत और हौसले के दम पर सामाजिक मिथकों को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम कर रही हैं। शिक्षा, खेल और रोजगार के क्षेत्र में वे न केवल अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि अपने संघर्ष और सफलता से समाज को भी प्रेरित कर रही हैं। कई बेटियां ऐसी हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए आगे बढऩे का साहस दिखाया है। किसी बेटी ने पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और पिता के कार्यो को संभाला तो कोई बेटी देश की सेवा के भाव से समर्पित होकर सेना की नौकरी कर परिवार का संबल बनी हुई है। अपने परिश्रम और आत्मबल से वह न केवल परिवार का सहारा बनी है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।
वहीं कुछ बेटियां ऐसी भी हैं, जो अपने अथक परिश्रम से अपने पिता के सपनों को साकार करने में जुटी हुई हैं। वे शिक्षा और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर निरंतर आगे बढ़ रही हैं, ताकि परिवार का नाम रोशन कर सकें और अपने सपनों को भी नई उड़ान दे सकें। बेटियों की यह लगन और जज्बा समाज के लिए प्रेरणादायक है।
तीसरे प्रयास में प्राची ने प्राप्त की 714वीं रैंक


नरसिंहपुर के नरसिंह वार्ड निवासी प्राची जैन ने यूपीएससी की परीक्षा में 714वीं रैंक प्राप्त की है। प्राची के पिता प्रमोद जैन व्यापारी हैं जबकि मां बबीता जैन गृहणी हैं। प्राची ने बताया कि हर माता पिता की तरह उनके माता-पिता का भी सपना था कि बेटी सफलता के नए कीर्तिमान बनाए। नरसिंहपुर में प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद भोपाल के कॉलेज से बीकॉम किया। इसके बाद वर्ष 2023 में तैयारी शुरू कर परीक्षा दी, उसके बाद वर्ष 2024 में भी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद वर्ष 2025 की परीक्षा में वह सफल हुईं।
निशा ने परिवार को संबल दे रहीं बीएसएफ में सेवारत निशा
अपने संघर्ष और हौसले से गोटेगांव के श्रीनगर निवासी निशा साहू परिवार का संबल बनी हैं। निशा बीएसएफ में सेवारत हैं, वे कहतीं हैं कि पिता नर्मदाप्रसाद का निधन होने के बाद मां सपना साहू और छोटे भाई की जिम्मेदारी संभाली। पांच साल से वह बीएसएफ के जरिए देश और परिवार की सेवा का दायित्व निभा रहीं हैं। निशा कहतीं हैं कि उनके जीवन में भी कई चुनौतियां आईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी।


मां का सहारा बन पिता के सपने को साकार कर रहीं ओशी
नरसिंहपुर की ओशी कुशवाहा न केवल छात्र जीवन से सामाजिक कार्यो में सक्रिय हैं बल्कि वह अपनी मां सविता के साथ पिता द्वारा शुरू किए गए स्कूल का संचालन भी कर रही हैं। ओशी कहतीं हैं कि पिता वर्ष 2019 में जिस दिन पुलवामा अटैक हुआ था उसी दिन उनके पिता केशव कुशवाहा का निधन हो गया था। जिसके बाद उन्होंने मां के साथ स्कूल की व्यवस्थाएं संभाली ताकि पिता के सपने को पूरा किया जा सके।


ऑटो चलाकर परिवार का सहारा बनी उमा कुशवाहा

नरसिंहपुर से लगे ग्राम मगरधा की निवासी उमा कुशवाहा 25 वर्ष पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार के लिए संबल बनी हुई हैं। बारहवीं तक शिक्षित उमा हर दिन सुबह करीब 6 बजे घर से निकलती हैं और शाम तक ऑटो चलाकर अपने परिवार के लिए आजीविका का प्रबंध करती हैं। उमा बताती हैं कि अब तक उनके सामने ऐसी कोई परिस्थिति नहीं आई, जिससे उन्हें अपना इरादा बदलना पड़े। घर के दैनिक कामकाज निपटाने के बाद वे अपने काम पर निकल जाती हैं और पूरे आत्मविश्वास के साथ दिनभर ऑटो चलाती हैं। उमा के इस सफर में उनके पति प्रशांत कुशवाहा का भी पूरा सहयोग मिलता है। प्रशांत स्वयं भी ऑटो चलाते हैं और पत्नी के इस निर्णय में हमेशा साथ खड़े रहते हैं। उमा की दो बेटियां हैं। वह चाहती हैं कि उनकी बेटियां अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और आत्मनिर्भर बनें। बेटियां भी अपने बलबूते अपने भविष्य का निर्माण करें और समाज में आगे बढकऱ अपनी पहचान बनाएं।