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नरसिंहपुर जिले में पांच साल में 80 हजार हेक्टेयर बढ़ा मूंग का रकबा, फिर भी बीज का संकट

summer mung नरसिंहपुर. जिले में पिछले पांच वर्षों में गर्मी की मूंग का रकबा 80 हजार हेक्टेयर से अधिक बढ़ गया है। बेहतर उत्पादन और मुनाफे के कारण किसान तेजी से मूंग की खेती की ओर बढ़े हैं। इसके बावजूद किसानों को अब भी बीज के संकट से निजात नहीं मिल पा रही है। इस […]

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जिले में पिछले पांच वर्षों में गर्मी की मूंग का रकबा 80 हजार हेक्टेयर से अधिक बढ़ गया है। बेहतर उत्पादन और मुनाफे के कारण किसान तेजी से मूंग की खेती की ओर बढ़े हैं। इसके बावजूद किसानों को अब भी बीज के संकट से निजात नहीं मिल पा रही है।

राजमार्ग क्षेत्र में मूंग की बोवनी के बाद सिंचाई चल रही है।

summer mung नरसिंहपुर. जिले में पिछले पांच वर्षों में गर्मी की मूंग का रकबा 80 हजार हेक्टेयर से अधिक बढ़ गया है। बेहतर उत्पादन और मुनाफे के कारण किसान तेजी से मूंग की खेती की ओर बढ़े हैं। इसके बावजूद किसानों को अब भी बीज के संकट से निजात नहीं मिल पा रही है। इस बार भी कई क्षेत्रों में बोवनी शुरू हो चुकी है, लेकिन किसानों का कहना है कि कृषि विभाग से मूंग का बीज उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। जिससे कई स्थानों पर किसान बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जिन किसानों ने अपने स्तर पर बीज का प्रबंध करके बोवनी कर दी है वह सिंचाई करने में जुटे हैं।
किसानों के अनुसार विभाग की ओर से न तो बीज वितरण की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है और न ही यह बताया जा रहा है कि बीज कब तक मिलेगा। ऐसे में बोवनी का समय निकलने की चिंता किसानों को सता रही है। कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में करीब 91 हजार हेक्टेयर में मूंग और 35 हजार हेक्टेयर में उड़द की बोवनी का लक्ष्य तय किया है, लेकिन किसानों का कहना है कि जब बीज ही नहीं मिल रहा है तो लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा। वहीं विशेषज्ञ लंबे समय से मूंग की फसल में तय अनुपात से अधिक दवाइयों के उपयोग से गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं। लेकिन कृषि विभाग इस समस्या को कम करने के लिए प्रभावी पहल करने के बजाय किसानों को उड़द की खेती के लिए प्रेरित करने में लगा हुआ है। जबकि किसानों का तर्क है कि मूंग की फसल उन्हें बेहतर मुनाफा देती है। कई किसान चना-गेहूं की कटाई करने के बाद मूंग की बोवनी करने के लिए तैयारी कर रहे हैं, बीज का प्रबंध करने में लगे हैं।
हर सीजन में खाद-बीज की समस्या
किसानों का कहना है कि हर सीजन में बोवनी के समय खाद और बीज की समस्या सामने आती है। बीते रबी सीजन में भी किसानों को खाद और बीज के लिए परेशान होना पड़ा और कई स्थानों पर कालाबाजारी की शिकायतें सामने आईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। किसानों के अनुसार विभागीय लापरवाही से उन्हें हर बार बोवनी के समय समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
गर्मी की मूंग का वर्षवार रकबा
2021 — 30,600 हेक्टेयर
2022 — 84,500 हेक्टेयर
2023 — 1,20,500 हेक्टेयर
2024 — 1,22,000 हेक्टेयर
2025 — 1,14,000 हेक्टेयर
इस वर्ष का लक्ष्य
मूंग — 91,000 हेक्टेयर
उड़द — 35,000 हेक्टेयर
वर्जन
मूंग की बोवनी करना है लेकिन बीज ही नहीं मिल रहा है। कृषि विभाग में जानकारी लेने पर कहा जाता है कि मूंग-उड़द बीज नहीं आया है।
प्रकाश सेनपुरिया, किसान
हर साल बोवनी के समय खाद-बीज की समस्या आती है, लेकिन विभाग समय पर व्यवस्था नहीं कर पाता। किसान परेशान होते हैं।
लक्ष्मण लोधी, किसान
बीज के लिए कई बार जानकारी ली, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इससे किसान परेशान हैं। समय पर बीज नहीं मिला तो नुकसान होगा।
दशरथ साहू, किसान