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जिले में डीजल-पेट्रोल, सिलेंडर की मांग दोगुनी, खत्म नहीं हो रही लाइन, भट्टियों-चूल्हे के सहारे कई व्यापारी चला रहे कार्य

The demand for diesel and petrol, as well as gas नरसिंहपुर. जिले में डीजल-पेट्रोल के साथ ही गैस सिलेंडरों की मांग दोगुनी हो रही है, जिससे न केवल डीजल-पेट्रोल पंपों पर बल्कि गैस एजेंसियों पर भी लोगों की लाइन खत्म नहीं हो रही है। न तो लोग दिन में धूप की परवाह कर रहे हैँ […]

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जिले में डीजल-पेट्रोल के साथ ही गैस सिलेंडरों की मांग दोगुनी हो रही है, जिससे न केवल डीजल-पेट्रोल पंपों पर बल्कि गैस एजेंसियों पर भी लोगों की लाइन खत्म नहीं हो रही है। न तो लोग दिन में धूप की परवाह कर रहे हैँ और न ही रात के भटकाव से परहेज कर रहे हैं।

धूप की परवाह किए बिना एक एजेंसी पर शनिवार की दोपहर उपभोक्ताओं की कतार।

The demand for diesel and petrol, as well as gas नरसिंहपुर. जिले में डीजल-पेट्रोल के साथ ही गैस सिलेंडरों की मांग दोगुनी हो रही है, जिससे न केवल डीजल-पेट्रोल पंपों पर बल्कि गैस एजेंसियों पर भी लोगों की लाइन खत्म नहीं हो रही है। न तो लोग दिन में धूप की परवाह कर रहे हैँ और न ही रात के भटकाव से परहेज कर रहे हैं। लोगों के मन में डीजल-पेट्रोल और गैस सिलेंडर का संकट बनने की आशंका इतनी घर कर चुकी है कि शासन-प्रशासन के साथ एंजेसियों और पंप संचालकों की तमाम समझाइश के बाद भी लोग सिलेंडर की बुकिंग करा रहे हैं और डीजल-पेट्रोल बड़ी मात्रा में खरीदने पहुंच रहे हैं। वहीं व्यवसायिक सिलेंडर न मिलने से कई कोयले की भट्टियों-चूल्हे के सहारे कई व्यापारी प्रतिष्ठान चलाने लाचार हो रहे हैं।
जिले में इन दिनों हर दिन 150 से 200 केएल तक डीजल-पेट्रोल की खपत हो रही है, जबकि सामान्य दिनों में यह खपत काफी कम रहती थी। जिले भर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 133 पंप संचालित हैं, जहां पर डीजल-पेट्रोल लेने उपभोक्ताओं में होड़ सी बनी हुई है। खासकर ग्रामीण इलाकों के पंपों पर डीजल-पेट्रोल की मांग अधिक बनी हुई है। जिसकी एक बड़ी वजह इन दिनों कृषि कार्य जोरशोर से चलना माना जा रहा है, लेकिन कार्यो से अधिक लोगों के मन में डीजल-पेट्रोल की आगामी समय में बनने वाली कथित कमी को लेकर बैठी आशंका अधिक असर दिखा रही है।
व्यवसायिक सिलेंडर की आपूर्ति बेहद कम
जिले भर में व्यवसायिक गैस कनेक्शनों की संख्या करीब 1331 है। जिसमें व्यापारी अपनी जरूरत के अनुसार सिलेंडर लेते हैं और उसका दाम चुकाते हैं। लेकिन बीते कई दिनों से व्यवयासिक सिलेंडर की आपूर्ति में बेहद कमी आ गई है और न के बराबर ही सिलेंडर बड़ी मशक्कत से मिल रहे हैं। जिससे कई प्रतिष्ठानों का संचालन मुश्किल से वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे हो रहा है। वहीं घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग भी लगातार बढऩे से एंजेसियों को मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है। एंजेसियों के जरिए ग्रामीण इलाकों में जो घर-घर जाकर सिलेंडर वितरित किए जाते थे वह व्यवस्था बंद होने से ग्रामीण उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेने एंजेसियों में आने की नौबत बनी है और धूप की परवाह किए बिना लाइन में लगकर सिलेंंडर पाने जतन करने पड़ रहे हैं। एक एजेंसी संचालक ने बताया कि शहरी क्षेत्र में ही मांग इतनी अधिक बनी है कि ग्रामीण क्षेत्र में वाहन भेजना मुश्किल हो गया है। लोग अफवाहों के कारण गैस की अनावश्यक बुकिंग करा रहे हैं। जबकि बुकिंग के चार से पांच दिन में ही सिलेंडर की आपूर्ति कर दी जाती है।


कोयला की भट्टियों व लकड़ी के सहारे कार्य
व्यवसायिक सिलेंडरों को लेकर बने संकट से कई व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान चालू रखने के लिए कोयले की भट्टियों और लकड़ी के सहारे चूल्हे जलाना शुरू कर दिए हैं। जिससे दुकान चलती रही और व्यापार में नुकसान न हो। राजमार्ग क्षेत्र के व्यापारी संतोष अग्रवाल, राजा अग्रवाल, भगतराम, शिवाजी आदि कहते हैं कि भट्टी और चूल्हे के सहारे कार्य करना पड़ रहा है, क्योंकि यदि ऐसा नहीं करेंगे तो दुकान-होटल बंद करने की नौबत बन जाएगी। जिससे जो कर्मचारी प्रतिष्ठानों में कार्यरत हैं उनके लिए भी संकट बनेगा और उन्हें भी दिक्कतें होंगी।
वर्जन
प्रशासन बार-बार लोगों से कह रहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, गैस सिलेंडर हो या डीजल-पेट्रोल आपूर्ति पर्याप्त है। लेकिन लोग जरूरत न होने पर भी सिलेंडर की बुकिंग करा रहे हैं, डीजल-पेट्रोल अधिक ले रहे हैं। पंप संचालकों को निर्देशित किया है कि वह भी उपभोक्ताओं को समझाएं और उनकी वास्तविक जरूरत को समझते हुए डीजल-पेट्रोल अधिक मात्रा में दें। अभी कृषि कार्यो की वजह से भी मांग बढ़ी है।
देवेंद्र खोबरिया, जिला आपूर्ति अधिकारी नरसिंहपुर
शहरी क्षेत्रों में ही मांग अधिक है इसलिए ग्रामीण केंद्रों पर गैस वितरण करने वाहन नहीं जा पा रहे हैं। व्यवसायिक सिलेंडर तो फिलहाल देना ही बंद है। घरेलू सिलेंडरों की सप्लाई बराबर है लेकिन मांग अधिक होने से समस्या बनी है। लोगों के मन में आशंका है कि कहीं कोई दिक्कत न बने जबकि ऐसा नहीं है।
मुकेश नेमा, एंजेसी संचालक नरसिंहपुर