गाडरवारा। भक्ति ज्ञान वैराग्य जीवात्मा के साथ रहते हैं। यह नष्ट नहीं होते, बल्कि यह जीव आत्मा को ऊपर उठाते रहते हैं। उनका फल लौकिक नहीं है, वृध्दावस्था में राम नाम स्मरण सहज में ही नहीं होता। इसके लिए मानव को सतत आदत लगानी चाहिए। मानव के पुण्य, शुभ कर्म कभी नष्ट नहीं होता। भक्ति का बीज पूर्व जन्म में पड़ जाने पर अक्ष्क्षुण रहता है। भक्ति के बीज सूखते नहीं है। नामदेव जी महाराज समदर्शी भक्त महापुरुष हैं। माता पिता गुरु में आसक्ति रहती है, प्रेम नहीं रहता। पंढरी नामक भक्त में माता पिता के प्रति प्रेम था। अपना सब सुख छोड़ कर दूसरों को सुख देना सेवा है। अपना काम छोड़कर भक्ति करना दो नंबर की बात है। ईंट पर खड़े होने के कारण ठाकुर जी का नाम वि_ल पड़ा। हनुमान जी महाराज संत हैं, उनकी विनम्रता है कि वह कहते हैं प्रात:काल में मेरा नाम लेने से भोजन नहीं मिलता। विनम्र के हृदय में भगवान रहते हैं, अहंकारी यह मत स्वीकार नहीं करते, उक्ताशय के विचार श्रीराम भवन एमपीईबी कॉलोनी में भक्तमाल कथा वाचन के दौरान ऋषिकेश हरिद्वार, कैलाश आश्रम के संत स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरीजी महाराज ने अपनी कथा में व्यक्त किए। स्वामी जी ने आगे कहा जबान के चार दोष हैं, झूठ, निंदा, अपमान, चुगली करना। संत नामदेव जी ने सामान्य जन को समझाने के लिए ग्रहस्थ आश्रम स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इस आश्रम में भी ईश्वर की प्राप्ति संभव है। जो मानव विषयानंद लेता है उसे ब्रह्मानंद नहीं मिलता। ईश्वर भक्तों के अपराध को सहन नहीं करते। प्रतिकूलता में भगवान की कृपा देखना भक्तों का लक्षण है। नामदेव जी महाराज व्यापारियों के आदर्श थे। स्वामीजी ने आगे बताया भक्ति तथा भक्त की जाति नहीं होती। ईष्र्या अकारण होती है, बाहर से जो काटता है वह मच्छर, भीतर से जो काटे वह मत्सर है। पहले अपने को साधक मानें तब जीवन में परिवर्तन आएगा। भक्त सर्वत्र समदृष्टि रहना चाहिए, यही संत नामदेव जी ने कुत्ते को रोटी रोटी में घी लगाने के प्रसंग में यह बात कही। स्वामी जी ने कहा भक्त भगवान के मुकुट मणि होते हैं। भक्त भगवान से बड़े होते हैं, इसलिए माता लक्ष्मीजी इन भक्तों का पर्दा करती हैं। अर्थात भक्तों के पास लक्ष्मीजी यथासाध्य रहती हैं। भक्तमाल कथा के साथ प्रतिदिन प्रात: 5:30 से योग शिविर भी जारी है। योग शिविर में नगरवासी स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। योग शिक्षक पंडित हरिओम शर्मा हरिद्वार द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार भक्तमाल कथा एवं योग शिविर 14 जनवरी तक जारी रहेगा। रघुवंशी परिवार ने अधिक से अधिक नगरवासियों क्षेत्रवासियों से पुण्य लाभ लेने की अपील की है।