
शुगर मिलों से निकलने वाली बगास से बनाए जा सकते हैं कई उत्पाद
नरसिंहपुर. प्रदेश में सबसे ज्यादा गन्ना और शकर उत्पादन के लिए अपनी पहचान रखने वाले इस जिले में गन्ने के बाय प्रोडक्ट के रूप में कार्ड बोर्ड और पार्टिकल बोर्ड के साथ कागज उद्योग की व्यापक संभावनाएं है। इंदौर में चल रही ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से इस जिले को भी यह उम्मीद है कि यहां भी इन उद्योगों की स्थापना की दिशा में कुछ काम हो सकता है। जिले में इसके लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के साथ ही रेल व सडक़ परिवहन के साधन भी हैं।
शुगर मिलों व खांडसारी से निकलता है बड़ी मात्रा में बगास
जिले भर में करीब 8 बड़ी शुगर मिलोंं सहित कई खंाडसारी शुगर मिलें चल रही है। जिनसे बड़ी मात्रा में गन्ने की पिराई के बाद बगास निकलता है। इस बगास से कार्डबोर्ड और पार्टिकल बोर्ड के उद्योग लगाए जा सकते हैं। वर्तमान में जिले में एक दो छोटी फै क्ट्रियां कार्ड बोर्ड और पार्टिकल बोर्ड बना रही हैं पर स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने व इनका उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ी उत्पादन इकाई की जरूरत है। नरसिंहपुर जिले से निकलने वाले गन्ने की बगास का उपयोग सागर जिले में कागज उद्योग में किया जाता है। जिससे वहां मोटे किस्म के कागज तैयार कर लिफाफा और अन्य सामग्री बनाई जाती है। नरसिंहपुर जिले मेें व्यापक संभावनाए हैं।
ईको फें्रडली डिस्पोजल यूनिट की भी गुंजाइश
गन्ने के भरपूर उत्पादन वाले नरसिंहपुर जिले में ईको फे्रंडली डिस्पोजल यूनिट की स्थापना की भी भरपूर गुंजाइश है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिले में गन्ने की छिलाई के बाद निकलने वाली पत्तियों से ईको फें्रडली डिस्पोजल दोना पत्तल की यूनिट लगाई जा सकती है। जानकारी के अनुसार यूपी के लखनऊ में इस तरह के ईको फें्रडली डिस्पोजल दोना पत्तल बनाए जा रहे हैं।
हाइवे पर विकसित किए जा रहे हैं क्लस्टर रेल ट्रांसपोर्ट की भी सुविधा
उद्योग विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे क्लस्टर हाइवे पर हैं। यहां से माल की सप्लाई प्रदेश के अन्य जिलों व दूसरे प्रदेशों में आसानी से की जा सकती है। पश्चिम मध्य रेलवे की जबलपुर इटारसी रेल लाइन जिले से होकर गुजरी है। जो देश के सभी बड़े शहरों से कनेक्ट है।
तेंदूखेड़ा, बरियाघाट, उमरिया, कठौतिया और बगासपुर में उपलब्ध है पर्याप्त भूमि
उद्योगों की स्थापना के लिए जिले में आवश्यक संसाधन मुहैया कराने की तैयारी भी उद्योग विभाग द्वारा की जा रही है। उद्योग विभाग के महाप्रबंधक नवीन कुशवाहा ने बताया है कि वर्तमान में एमपीआईडीसी विभाग द्वारा जिले के तेंदूखेड़ा और बरियाघाट क्षेत्र में करीब 125 हेक्टेयर भूमि को उद्योग स्थापना के उददेश्य से विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा गोटेगांव के बगासपुर में करीब 10 एकड़ भूमि को विकसित करने की कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। वहीं उमरिया में 54 हेक्टेयर जमीन और कठौतिया में भी क्लस्टर तैयार किए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इन जगहों पर संबंधित एजेंसी को डिमांड के अनुसार क्लस्टर एप्रोच के तहत शासन स्तर से जगह मुहैया कराई जा सकती है।
इनका कहना है
नरसिंहपुर जिले में शुगर मिलों से काफी मात्रा में बगास निकलती है। इससे जिले में लार्ज स्के ल पर गत्ता,कार्डबोर्ड और पार्टिकल बोर्ड की यूनिट लगाई जा सकती है। इससे जहां जिले से बाहर जाने वाली बगास का प्रसंस्करण स्थानीय स्तर पर होगा वहीं इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
नवनीत पाराशर, पार्टीकल बोर्ड निर्माता नरसिंहपुर
गन्ने से निकलने वाले सह उत्पादों की एक लंबी श्रंंखला नरसिंहपुर जिले में मौजूद है। इससे निकलने वाले अवशिष्टों के माध्यम से एनर्जी सेक्टर,ईको फ्रेंडली डिस्पोजल,कागज उद्योग सहित गुड़ के परिष्करण की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं। इनसे स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के साधन मिल सकते हैं।
डा आशुतोष शर्मा, कृषि वैज्ञानिक नरसिंहपुर
Published on:
09 Jan 2023 11:24 pm

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