
करेली कला गांव में पेटी विधि से शहद उत्पादन की प्रक्रिया दौरान समूह की सदस्य एवं अन्य अधिकारी।
honey through the box method नरसिंहपुर. जिले में आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों द्वारा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। विकासखंड गोटेगांव के ग्राम करेली कला में पहली बार पेटी विधि के माध्यम से मधुमक्खी पालन से शहद निकालने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। यह प्रयोग न केवल तकनीकी रूप से सफल रहा, बल्कि समूह की सदस्यों के लिए आजीविका के नए अवसर बन गए हैं।
इस पहल के तहत कुल 100 पेटियों में से प्रारंभिक चरण में 10 पेटियों से शहद निकाला गया। प्रक्रिया के दौरान 22 लीटर 500 ग्राम शहद का उत्पादन दर्ज किया गया।
शहद निष्कर्षण की पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध और व्यावहारिक रूप से समझाया गया, ताकि समूह की सदस्य आगे स्वयं इस कार्य को कुशलता से कर सकें। कार्यक्रम में चांवरपाठा क्षेत्र की बोहनी समूह की सदस्यों ने भी सक्रिय भागीदारी की। उन्हें शहद निकालने की तकनीक, स्वच्छता, गुणवत्ता बनाए रखने और संग्रहण से जुड़े जरूरी बिंदुओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण भविष्य में उत्पादन बढ़ाने और बाजार से जुड़ाव के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
यह गतिविधि जिला पंचायत सीइओ गजेंद्र नागेश के मार्गदर्शन में संचालित की गई, जिसे आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में चांवरपाठा और गोटेगांव दोनों विकासखंडों के ब्लॉक प्रबंधक, स्व-सहायता समूह की सदस्य, अन्य सहयोगी सदस्य तथा एग्रो कंपनी के प्रतिनिधि जय भी उपस्थित रहे। प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर सक्रिय सहभागिता भी देखने को मिली।
निरंतर प्रयास से बनेगी स्वरोजगार की नई मिसाल
एसीइओ उदयप्रताप सिंह ने कहा कि करेली कला में हुआ यह पहला प्रयोग यह संकेत देता है कि मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन आने वाले समय में ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी और सशक्त साधन बन सकता है। यदि यह प्रयास इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो जिले में आजीविका मिशन के तहत स्वरोजगार की नई मिसाल कायम हो सकती है।
Published on:
04 Jan 2026 12:52 pm
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