11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

नरसिंहपुर जिले में जिले में गोदाम स्तरीय 14 केंद्र फुल, खुले में पड़ी लाखों क्विंटल धान

जिले में समर्थन मूल्य पर धान की इस बार बंपर खरीद चलने से करीब 14 केंद्रों पर लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ी है।

3 min read
Google source verification
बंपर खरीद चलने से करीब 14 केंद्रों पर लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ी है।

जिले में इस तरह केंद्रों पर लाखों क्विंटल धान खुले में पड़ी है।

Due to the bumper procurement of paddy नरसिंहपुर. जिले में समर्थन मूल्य पर धान की इस बार बंपर खरीद चलने से करीब 14 केंद्रों पर लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ी है। जिसका दूसरे गोदामों में सुरक्षित भंडारण कराने के लिए करीब आधा सैंकड़ा ट्रकों को परिवहन में लगाया जा रहा है। जिससे बिगड़े मौसम की मार से सरकारी धान पर असर न हो। जो गोदाम स्तरीय केंद्र खरीदी से भर गए हैं उनमें धान लेकर आने वाले किसानों को अपनी उपज रखने जगह नहीं बची है जिससे खरीदी कार्य पर भी असर हो रहा है। जिले भर में अब तक 76 हजार 988 मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। जिसमें भंडारण सिर्फ 65 हजार 137 मीट्रिक टन का हुआ है। जबकि 13 हजार से अधिक किसानों ने उपज विक्रय करने के लिए स्लाट बुक करा लिए हैं। लेकिन किसानों के सामने संकट यह है कि वह उपज लेकर केंद्र जाएंगे तो कहां उपज रखेंगे।
जिले भर में 45 केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर धान की खरीद हो रही है। जो गोदाम स्तरीय हैं लेकिन अभी पंजीकृत 16 हजार 397 किसानों में से करीब 8 हजार 515 किसानों से ही खरीद हुई है और करीब 14 गोदाम भर गए हैं। ऐसे में जब पंजीकृत शत प्रतिशत किसानों से खरीद होगी तो गोदामों की स्थिति क्या रहेगी इसे लेकर कर्मचारियों के साथ ही किसान भी संशय और परेशानी में हैं। क्योंकि बिगड़े मौसम और केंद्रों की स्थिति देख कई किसान अपनी उपज लेकर केंद्रों में जाने से घबरा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं मौसम की मार से उपज को नुकसान न हो जाए, केंद्रों पर अनाज इस तरह खुले में रखा है कि किसानों को अपनी उपज रखने या उपज लेकर पहुंचने वाले वाहनों को भी सुरक्षित खड़ा रखने जगह नहीं दिख रही है। बताया जाता है कि प्रशासन ने जिन गोदामों को केंद्र बनाया है उनमें से कई गोदाम ऐसे हैं जिनमें पहले से ही अनाज रखा है इसलिए ऐसे गोदामों में जगह की कमी का खामियाजा किसानों के साथ ही कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। यदि प्रशासन धान के लिए गोदामों को केंद्र बनाने के पहले उनकी क्षमता का सही आंकलन करता, या गोदामों को पूरी तरह खाली करवाता तो यह नौबत नहीं बनती। गोदामों में भंडारण क्षमता की कमी का खामियाजा अब किसानों के साथ ही प्रशासन को भी उठाना पड़ रहा है।
71 हजार 778 मीट्रिक टन धान परिवहन के लिए तैयार
नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों का कहना है कि केंद्रों पर करीब 71 हजार 778 मीट्रिक टन धान परिवहन के लिए तैयार रखी है। केंद्र भरने से एक लाख क्विंटल से अधिक धान रखी हुई है। जिले में करीब चार-पांच साल के बाद यह स्थिति बनी है कि ट्रांसपोर्टर के जरिए केंद्रों से उपज का भंडारण दूसरे गोदामों में कराया जा रहा है। जिससे पूर्व के ट्रांसपोर्टर को ही समन्वय के आधार पर परिवहन कार्य सौंपा गया है। जिसके 41 वाहन परिवहन में लगाए गए हैं और मंगलवार की शाम 11 वाहनों को और गोटेगांव क्षेत्र में भेजा गया है। संभावना है कि बुधवार को वाहनों की संख्या और बढ़ जाएगी। गोटेगांव क्षेत्र की धान को कठौतिया स्थित सीडब्ल्यूसी गोदाम में भंडारित किया जा रहा है जबकि गाडरवारा क्षेत्र की धान को उसी क्षेत्र के कान्हा वेयर हाउस में भंडारित कराया जा रहा है। खरीदी कार्य में लगी समितियों को निर्देशित किया गया है कि वह मौसम को देखते हुए तिरपाल आदि की व्यवस्था रखें ताकि बारिश की स्थिति बनने पर उपज को नुकसान से बचाया जा सके।
आधे से ज्यादा खरीद के बाद बाहरी धान रोकने सक्रियता
जिले में धान की खरीद का कार्य लगभग आधा हो चुका है। इसके बाद अब प्रशासन ने जिले में बाहर से आने वाली धान की रोकथाम करने सक्रियता बढ़ाई है। क्योंकि कलेक्टर रजनी सिंह को धान उपार्जन की समीक्षा में यह तथ्य परिलक्षित हुए है कि विगत वर्ष उपार्जित धान मात्रा का इस वर्ष अभी तक लगभग 90 प्रतिशत मात्रा के बराबर उपार्जन हो चुका है, जबकि उपार्जन समाप्त होने के 15 दिन शेष है। जिले में बाहर से आ रही धान को रोकने राजस्व, सहकारिता व कृषि विभाग और कृषि उपज मंडी के मैदानी अमले को जांच करने निर्देशित किया गया है।
खरीदी केंद्रों में न हो पानी का भराव
धान को असमय बारिश से बचाने जहां अमले को पर्याप्त तिरपाल से उपज को कवर करने कहा गया है। वहीं यह भी निर्देश दिए हैं कि कहीं भी खरीदी केंद्रों पर बारिश का पानी न भरे। धान परिवहन के लिए अतिरिक्त ट्रक लगाए जाएं। तौल शीघ्रता से कराएं। गुणवत्ता परीक्षण में एफएक्यू पाए गए धान को बोरों में भरकर रखा जाए। किसानों को अपनी उपज तिरपाल आदि से कवर कर लाने कहा जाए।
वर्जन
जिले के अभी 14 केंद्रों पर भंडारण फुल होने से धान का उठाव कराया जा रहा है। ट्रांसपोर्टर से वाहन बढ़ाने कहा है, एक लाख क्विंटल से अधिक धान का उठाव होना है। समितियों को तिरपाल आदि की व्यवस्था करना है। गोटेगांव-गाडरवारा क्षेत्र से ही धान का उठाव दूसरे गोदामों में हो रहा है।
शशिप्रभा पैगवार, प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम नरसिंहपुर