
अस्पताल की छत पर रखीं टंकियां जिनसे वार्डो में पानी जाता है।
water supply नरसिंहपुर. जिला अस्पताल जहां जिले के अलावा पड़ोसी जिलों से भी इलाज कराने मरीज पहुंचते हैं वहां सफाई व्यवस्था दोयम दर्जे की है। मरीजों को प्यास बुझाने के साधन के नाम पर सिर्फ 4 वॉटर कूलर और एक टंकी है। जबकि अस्पताल के दोनों भवनों में जलापूर्ति के लिए 31 टंकिया हैं। लेकिन इनका पानी की जांच बीते साल अक्टूबर माह में हुई थी, इसके बाद अब तक जांच नहीं हुई है। जिससे पानी की शुद्धता पर संशय बना है। मरीजों और उनके परिजनों को प्यास बुझाने के लिए रोजाना दिन में कई बार वॉटर कूलरों तक भागदौड़ करना पड़ती है।
जिला अस्पताल में 300 बेड की क्षमता का है, जहां पर हर दिन सैंकड़ों मरीजों का आना होता है। लेकिन यहां मरीजों, अटेंडरों, कर्मचारियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के साधन सीमित है। यहां 5 बोरवेल से छत पर रखीं 31 टंकियों को भरा जाता है। जिनके माध्यम से एमसीएच और ट्रामा के वार्डो और अन्य भवनों में पानी की आपूर्ति होती है। लेकिन वॉटर कूलर सिर्फ चार जगह लगे हैं। जिससे मरीजों और उनके अटेंडरों को प्यास बुझाने समेत अन्य कार्यो के लिए पानी लेने वार्डो से निकलकर नीचे आना पड़ता है। ब्लड बैंक के सामने बनी टंकी के आसपास गंदगी जमा है। पुराने नेत्र विभाग के पास लगा वॉटर कूलर प्रबंधन ने इस तर्क के साथ निकलवा दिया है कि वॉटर कूलर के कारण आसपास पानी पहुंचता था, गंदगी होती थी। लेकिन निकाले गए इस वॉटर कूलर को अन्य कहीं स्थापित नहीं किया गया है। ट्रामा के ऊपरी वार्डो से लेकर एमसीएच के ऊपरी हिस्से के वार्डो में भी लोगों को पीने के पानी के लिए हर दिन हर घंटे परेशान होना पड़ता है।
टंकियों पर चस्पा सफाई की सूचना हुई फीकी
एमसीएच भवन की छत पर बड़ी-बड़ी टंकिया रखी हैं, जिनमें सभी टंकियों में सफाई और जांच की तिथि कागज चस्पा कर लिखी गई है। जो अधिकांश टंकियों की फीकी पड़ चुकी है, बारीकि से देखने पर जांच बीते अक्टूबर माह की तिथि नजर आती हैं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि 300 बेड के मान से पानी की व्यवस्था प्रति मरीज 200 लीटर के मान से कहीं अधिक है। तीन से चार माह के अंतराल में पीएचई के जरिए जांच कराई जाती है। प्रबंधन यह तो कह रहा है कि वॉटर कूलर की संख्या बढ़ाई जाना है लेकिन यह समस्या भी बताता है कि वार्डो के आसपास वॉटर कूलर लगाने से पानी की दुरुपयोग अधिक होता है और गंदगी फैलती है।
अधिकांश कर्मचारी घरों से लाते हैं पानी
अस्पताल के अधिकांश कर्मचारी घरों से पानी लेकर आते हैं क्योंकि उन्हें अस्पताल की टंकियों और वॉटर कूलर का पानी रास नहीं आता। बार-बार पानी लेने के लिए बाहर जाना भी संभव नहीं रहता।
वर्जन
मरीज देखने आए हैं लेकिन यहां तो पानी की बहुत समस्या है, नीचे जाकर ही पानी लाना पड़ता है। दिन में तो ठीक है लेकिन रात को दिक्कत होती है।
कल्याण यादव, अटेंडर
पानी की तो बहुत बड़ी समस्या है, अधिकांश समय पानी ढोने में ही बीत जाता है। यदि वार्ड के पास ही वॉटर कूलर होता तो सबको राहत मिलती।
विशाल सिंह, अटेंडर
मरीज के साथ रहते हैं तो पानी बहुत लगता है क्योंकि दिन रात यही रहना है। बार-बार सीढ़ी उतरकर नीचे जाना और पानी लाना परेशान करता है।
राजू मेहरा, अटेंडर
मजबूरी है या तो बाहर से पानी लेकर आओ या फिर आते समय पानी की बॉटल लेकर आओ, कोई आदमी रोज तो पानी खरीदने से रहा इसलिए नीचे से लाते हैं।
शिवकुमार, अटेंडर
पिछले अक्टूबर माह में ही पीएचई से पानी की जांच रिपोर्ट आई थी, पानी में कोई दिक्कत नहीं है, वॉटर कूलरों की कमी तो है और इसे दूर करेंगे लेकिन कुछ व्यवहारिक समस्याएं हैं, गंदगी बहुत होती है, रोकना मुश्किल होता है।
Published on:
16 Jan 2026 01:04 pm
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