
ग्रामीण के घर का कमरा जहां बच्चे पढ़ते मिले।
Education Department team visited Jogitola नरसिंहपुर. शुक्रवार को पत्रिका में जर्जर भवन में 20 बच्चों को खतरा, कक्षाएं स्थगित करने लिखा पत्र शीर्षक से खबर प्रकाशित होते ही शिक्षा विभाग की टीम जोगीटोला पहुंची। यहां बीआरसी-जनशिक्षक ने वर्षा से सुधार कार्य नहीं होने से बदहाल स्कूल की हालत देखी। टीम को यहां ग्राम के रामदास यादव के बिना छपाई वाले कमरे में बच्चों को शिक्षक पढ़ाते हुए मिले। बच्चों के भविष्य की चिंता में रामदास ने ही शिक्षकों को कमरे की जगह दी है ताकि जगह की कमी से बच्चों की पढ़ाई चौपट न हो। टीम ने कक्ष को भी देखा और कहा कि जब तक भवन की मरम्मत नहीं हो जाती यहीं पर बच्चों की पढ़ाई कराई जा सकती है।
शुक्रवार को डीपीसी प्रदीप द्विवेदी के निर्देश पर नरसिंहपुर विकासखंड के बीआरसी ओपी राय, जनशिक्षक मधुसूदन दुबे बिछुआ पंचायत के जोगीटोला में प्राथमिक स्कूल का जर्जर भवन, उखड़े पलस्तर वाली छत, कमजोर दीवारों और गड़्ढेदार फर्श का निरीक्षण किया। प्रधानपाठक जगदीश प्रसाद डेहरिया से भवन और समस्याओं संबंधी जानकारी ली। टीम के टोला आने की खबर लगते ही कुछ ग्रामीण भी पहुंच गए। रामदास यादव के यहां जिस कमरे में बच्चे नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे थे उन्हें देखा। बीआरसी ने बताया कि स्कूल की मरम्मत के संबंध में पहले ही कार्रवाई चल रही है, जब तक मरम्मत नहीं हो जाती तब तक ग्रामीण के यहां ही स्कूल का संचालन किया जा सकता है। इसके लिए प्रधानपाठक से भी कहा गया है। टोला निवासी रामदास ने बताया कि उसने ही पहल करके बच्चों के भविष्य की खातिर बिना छपाई वाला कमरा कक्षा लगाने दिया है। जिसकी दीवार पर ब्लैक बोर्ड लगाकर शिक्षक बच्चों को पढ़ाने लगे हैं।
तीन साल से स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर है
जिला मुख्यालय से करीब 55-60 किमी दूर बिछुआ ग्राम पंचायत के जोगीटोला की आबादी करीब 250 है। जहां प्राथमिक स्कूल है। टोला के आसपास नाले है जिसमें टोला के 20 बच्चे पढ़ते हैं, दो शिक्षक पदस्थ हैं। तीन साल से स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर है, छत का क्रांकीट टूटकर गिर रहा है, कमरों के अंदर भर जाता है। इससे स्कूल में पढ़ाई कराना विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण हो गया है। भवन की समस्या से प्रधानपाठक-शिक्षक विभाग को कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
तीन साल से खुले स्थान पर कक्षाएं
बताया जाता है कि स्कूल के प्रधानपाठक जगदीश प्रसाद डेहरिया ने विभाग को पत्र के जरिए जो समस्याएं बताईं, उसमें यह भी बताया है कि गांव में ऐसा कोई सार्वजनिक भवन, आंगनबाड़ी अथवा अन्य शासकीय भवन उपलब्ध नहीं है, जहां वैकल्पिक रूप से कक्षाएं संचालित की जा सकें। गंभीर दुर्घटना की आशंका से पिछले तीन वर्षों से स्कूल का संचालन खुले स्थान पर किया जा रहा था, लेकिन बारिश के मौसम में यह भी संभव नहीं रह गया है। पत्र में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सुरक्षित भवन उपलब्ध होने तक बारिशकाल में शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करना संभव नहीं होने की जानकारी देकर मार्गदर्शन भी मांगा।
तीन किमी पैदल चलकर आते हैं शिक्षक
ग्राम के रामदास यादव, महेश यादव, नेतराम, कृष्णकुमार आदि कहते हैं कि स्कूल तो जर्जर है ही, स्कूल आने रास्ता भी कच्चा है। शिक्षक तीन किमी पैदल चलकर आते हैं। पंचायत में ढारिया, सर्रा टोला भी शामिल हैं जहां स्कूल तो हैं लेकिन टोला से इन गांवों की दूरी अधिक है, टोला के पास नाले भी हैं। जिससे बच्चों को दूसरे स्कूल में भी नहीं भेजा जा सकता। क्योंकि आने-जाने में बहुत दिक्कत होगी। यदि टोला का स्कूल बंद हो जाएगा तो हमारे बच्चों के भविष्य का क्या होगा।
कक्षावार यह है दर्ज संख्या
कक्षा पहली- 02
कक्षा दूसरी- 03
कक्षा तीसरी-02
कक्षा चौथी-07
कक्षा पांचवी-06
Updated on:
11 Jul 2026 12:32 pm
Published on:
11 Jul 2026 12:30 pm
