
जिले में पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए अवैध हथियार। फाइल फोटो।
weapons during minor altercations नरसिंहपुर. (प्रकाश चौबे) जिले में आए दिन छोटी-छोटी रंजिशों, विवादों और आपराधिक घटनाओं में हथियारों के उपयोग की प्रवृत्ति कुछ वर्षो में तेजी से बढ़ रही है। जिसे रोक पाना न केवल पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रहा है बल्कि यह बदलती सामाजिक मानसिकता के लिए भी चिंताजनक बन रहा है। जिले में पांच साल तीन माह के अंतराल में आम्र्स एक्ट के करीब 1244 मामले दर्ज हो चुके हैं। अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई से बीते तीन सालों से दर्ज मामलों की संख्या में तो कमी आई है लेकिन अवैध हथियारों के सप्लाई नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जा सका है। जिससे अवैध हथियार जिले में इधर-उधर से लगातार पहुंच रहे हैं।
जिले में अवैध हथियारों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद आम्र्स एक्ट के तहत दर्ज हो रहे मामलों के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि समस्या अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रही है। हर साल सामने आ रहे सैकड़ों प्रकरण यह दशा रहे हैं कि अवैध हथियारों की सप्लाई और मांग कानून व्यवस्था व बदलते सामाजिक दृष्टिकोण दोनों ही स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
वर्ष 21 से 24 तक लगातार बढ़े प्रकरण
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 289, वर्ष 2022 में 239 और वर्ष 2023 में 387 प्रकरण दर्ज हुए। वर्ष 2024 में 172 और 2025 में 147 मामले सामने आए, जबकि वर्ष 2026 में अब तक 10 प्रकरण दर्ज हो चुके हैं। बीते दो वर्षो और जारी वर्ष के तीन माह की कार्रवाई को देखें तो दर्ज हुए प्रकरणों में 348 आरोपी पकड़े गए हैं। आंकड़ों में गिरावट को पुलिस की सक्रियता से जोडकऱ देखा जा रहा है, लेकिन लगातार मिल रहे हथियार यह भी बताते हैं कि सप्लाई चेन अभी भी सक्रिय है। जिसे अपराधों का ग्राफ घटाने तोडऩा बेहद जरुरी है। जिससे अपराधियों और इनके सप्लायरों में कानून का भय दिख सके।
कहां से आते हैं हथियार बना है रहस्य
जिले में अवैध हथियार कहां से आते हैं और सप्लायरों का नेटवर्क जिले में कितनी जड़े जमाए हुए है यह लंबे समय से रहस्य बना है। पुलिस अपने अभियानों और सतत कार्रवाई में अवैध हथियार तो पकड़ लेती है लेकिन उसके लिए इन हथियारों की सप्लाई चैन तक पहुंचना मुश्किल होता है। बताया जाता है कि अवैध हथियारों का नेटवर्क जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से जुड़े लिंक के जरिए इनकी आपूर्ति होती है। छोटे स्तर पर काम करने वाले सप्लायर, बिचौलिए इस नेटवर्क को चलाते हैं।
रील लाइफ व सोशल मीडिया बिगाड़ रहे मनोदशा
विशेषज्ञ कहते हैं कि कुछ वर्षो में लोगों में हथियार रखने और दिखाने की मानसिकता तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। रील लाइफ और सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स पर हथियारों के साथ बनाए जा रहे वीडियो और आक्रामक छवि को बढ़ावा देने वाले कंटेंट इस प्रवृत्ति को और हवा दे रहे हैं। इस मनोदशा को बदलने के लिए सिर्फ कानून-व्यवस्था के स्तर पर पुलिस की कार्रवाई की विकल्प नहीं है बल्कि इसके सामाजिक कारणों पर भी काम करना जरूरी है। खासकर युवा और बच्चे क्या कंटेंट देख रहे हैं, उनकी मनोदशा किस तरह बदल रही इस पर निगरानी जरूरी है।
आम्र्स एक्ट के दर्ज प्रकरणों के वर्षवार आंकड़े
वर्ष 2021 — 289
वर्ष-2022 — 239
वर्ष- 2023 — 387
वर्ष- 2024 — 172
वर्ष-2025 — 147
वर्ष-2026 (अब तक) — 10
क्यों बढ़ रही प्रवृत्ति
सोशल मीडिया पर हथियारों का ग्लैमर
रील लाइफ से प्रभावित युवा मानसिकता
छोटी रंजिशों में हथियारों का उपयोग
आसान उपलब्धता और नेटवर्क सक्रिय
वर्जन
पिछले कुछ महिनों में हमनें जो कार्रवाई की हैं उनमें सप्लाई चैन तक भी पहुंचे हैं। पुलिस का साफ संदेश है कि अवैध हथियारों का शौक न पालें नहीं तो कठोर कार्रवाई होगी। यदि किसी नाबालिग के पास अवैध हथियार मिलता है तो उसके पालक को भी जिम्मेदार बनाएंगे। पुलिस की लोगों से अपील है कि अपने बच्चों, युवाओं पर नजर रखें ताकि वह किसी गलत रास्ते पर न जाएं।
डॉ. ऋषिकेश मीना, एसपी नरसिंहपुर
Published on:
07 Apr 2026 01:36 pm
बड़ी खबरें
View Allनरसिंहपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
