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विक्रम के लैंड करते ही चांद पर उड़ी थी 2.06 टन मिट्टी, जानना चाहेंगे कि इजेक्ट हेलो क्या है?

Chandrayaan-3: भारत के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। इसरो ने एक्स पर ‘इजेक्ट हेलो’ बनने का ब्योरा दिया है।

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अगस्त में भारत के चंद्रयान-3 ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया था। उस दिन यान लैंड करते ही दक्षिणी ध्रुव पर एक घटना और हुई थी। विक्रम लैंडर के लैंड करते ही चांद की सतह पर इतनी मिट्टी उड़ी कि उसने चांद पर ‘इजेक्ट हेलो’ (एक तरह का प्रभामंडल) तैयार कर दिया। इसरो ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट में इस घटना का ब्योरा दिया। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि विक्रम के लैंड करने के दौरान करीब 2.06 टन मिट्टी चांद के 108 वर्ग मीटर इलाके में फैल गई। चांद पर शायद कुछ वैसा ही हुआ होगा, जैसे किसी हेलिकॉप्टर के उतरने के दौरान धरती पर धूल उड़ती है।

चांद पर उड़ने वाली मिट्टी टेलकम पाउडर से भी पतली

चंद्रयान-3 के लैंडर ने जब चांद की धरती पर लैंडिंग की प्रक्रिया शुरू की तो चांद की सतह से मिट्टी आसमान में उडऩे लगी। ऐसी मिट्टी और उसमें मौजूद चीजों को वैज्ञानिक भाषा में एपिरेगोलिथ कहा जाता है। चांद की सतह की मिट्टी टेलकम पाउडर से ज्यादा पतली है जो चंद्रयान-3 के लैंडर में लगे रॉकेट बूस्टर के चांद की सतह पर लैंडिंग के समय ऑपोजिट डायरेक्शन में फायर करते ही उड़ने लगी थी। लैंडर तेज गति से सतह की ओर बढ़ रहा था और इसकी गति धीमी करना जरूरी था।

इसके लिए इसमें लगे रॉकेट बूस्टर को ऊपर की ओर फायर किया गया। इससे वह लैंडर को खास गति पर ऊपर की ओर धकेल रहा था। धीरे-धीरे रॉकेट बूस्टर की फायरिंग के जरिए लैंडर की गति शून्य की गई। इस दौरान जितना समय लगा उतनी देर तक चांद की मिट्टी सतह से ऊपर उड़ती रही और लैंडिंग साइड से दूर जाकर फिर चांद की सतह पर गिरती रही।

हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी का अध्ययन

चांद पर घटी इस घटना को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने चंद्रयान के ऑर्बिटर में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे की मदद ली। उन्होंने विक्रम के उतरने से कुछ घंटे पहले और बाद में मिली हाई-रिजॉल्यूशन पैनक्रोमेटिक इमेजरी का अध्ययन किया। इससे 'इजेक्ट हेलो' का पता चला। यह लैंडर के चारों तरफ अनियमित चमकीले पैच के रूप में दिखाई दिया। धरती के वातावरण में इस तरह की घटना सामान्य बात है।

रिसर्च के लिए खुले नए रास्ते

यह घटना चांद की सतह पर मौजूद चीजों/सामग्रियों के व्यवहार के बारे में जानकारी देती है। साथ ही चांद की सतह के अनुसंधान के लिए नए रास्ते खोलती है। लैंडर से बाहर निकले रोवर प्रज्ञान ने अपने पेलोड्स के जरिए चांद की सतह पर होने वाली खगोलीय घटनाओं का अध्ययन कर रिपोर्ट भेजी थी। इसने चांद की मिट्टी में सल्फर, ऑक्सीजन जैसे दुर्लभ तत्वों की मौजूदगी की पुष्टि की।

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