
उत्तराखंड में उत्तरकाशी सुरंग हादसे में बीते 14 दिन से फंसे 41 मजदूरों के लिए नई सुबह का इंतजार और लंबा हो गया है। रेस्क्यू के लिए डाली जा रही पाइप लाइन की ड्रिलिंग में बार-बार आ रही बाधाओं की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीम को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ड्रिलिंग के रास्ते में कभी सरिया तो कभी पत्थर बाधा बन रहे हैं। इस वजह से ड्रिलिंग को बार-बार रोकना पड़ रहा है।
स्ट्रेचर के जरिए बाहर निकाले जाएंगे मजदूर
टनल में जैसे-जैसे ड्रिलिंग पाइप लाइन मजदूरों के करीब पहुंच रही है वैसे-वैसे एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी मुस्तैद हो गई है। एनडीआरएफ की टीम मजदूरों को पाइप के जरिए श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए तैयार है। एनडीआरएफ ने 800 मिमी पाइप के भीतर से मजदूरों को निकालने के लिए गोलाकार स्ट्रेचर बनाया है। इसे शुक्रवार को पाइप के भीतर डालकर मजदूरों को बाहर निकालने की मॉक ड्रिल की। इन स्ट्रेचर के माध्यम से एसडीआरएफ की टीम भी उन्हें तेजी से एंबुलेंस या पास में बने हुए अस्थायी अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा।
ड्रोन की ली जा रही मदद
ऑपरेशन सिलक्यारा में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने बंगलूरु से दो एडवांस ड्रोन मंगाए है। इन ड्रोन कैमरों को सुरंग के अंदर भेजा गया है। रडार सेंसर और जियोफिजिकल सेंसर से लैस यह ड्रोन किसी भी तरह के मलबे की पूरी तरह स्कैनिंग कर सकते हैं। इनकी मदद से सुरंग के अंदर के हालात रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। इसके बाद एआइ की मदद से डाटा इक_ा किया जा रहा है। इस डाटा से बचाव अभियान को काफी मदद मिल रही है।
ऋषिकेश एम्स अलर्ट
सिलक्यारा टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के बाद ऋषिकेश स्थित एम्स लाया जाता है। इसके लिए एम्स के चिकित्सकों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर नरेंद्र कुमार ने बताया कि श्रमिकों को एयरलिफ्ट कर लाया एम्स लाया जा सकता है। इसके लिए 41 बेडों की व्यवस्था की गई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की चार टीमें गठित कर उन्हें अलर्ट मोड पर रखा गया है।
Updated on:
25 Nov 2023 07:44 am
Published on:
25 Nov 2023 07:43 am
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