
500% Rise In Hate Speech Cases Against Politicians & Public Functionaries Since 2014: Supreme Court
Supreme Court on Hate Speech: भड़काऊ भाषणबाजी (Hate Speech) के मामले बीते कुछ सालों से काफी तेजी से बढ़े है। कई मौके पर राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर हेट स्पीच दिया जाता है। इससे न केवल समाज में विद्वेष फैलता है बल्कि दंगे की आशंका भी होती है। हेट स्पीच पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई है। जिनपर शीर्ष अदालत अलग-अलग समय में सुनवाई करती है।
इस बीच हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका से अहम जानकारी सामने आई है। दायर याचिका में बताया गया है कि 2014 के बाद से राजनेताओं और पब्लिक सर्वेंट (अफसरों) के खिलाफ हेट स्पीच के मामले 500 प्रतिशत तक बढ़ गए है। इस याचिका में आंकड़ों के साथ हेटस्पीच के मामलों में हुई बढ़ोतरी की जानकारी देते हुए सुप्रीम कोर्ट से आदर्श आचार संहिता बनाने की अपील की गई है।
यह याचिका बुलंदशहर रेपकेस पर नेताओं द्वारा दिए गए बयान के बाद सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। मालूम हो कि बुलंदशहर रेप केस में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने कहा था कि यह एक राजनीतिक साजिश है और कुछ नहीं। हेट स्पीच के मामले में ही आजम खान की विधानसभा सदस्यता रद्द हुई है। उनकी रामपुर विधानसभा सीट पर चुनाव आयोग ने हाल ही में उपचुनाव का ऐलान किया है।
दूसरी ओर हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में हेट स्पीच के मामलों में काफी वृद्धि हुई है।
याचिकाकर्ता ने एक समाचार चैनल द्वारा जमा किए गए आंकड़ों पर भरोसा जताते हुए कहा कि मई 2014 से अभी तक 45 राजनेताओं द्वारा वीआईपी हेटस्पीच के 124 मामले दर्ज किए गए। जबकि 2014 से पहले ऐसे मामले मात्र 21 थे। हेट स्पीच से संबंधित इस याचिका में आरएसएस और भाजपा जुड़े नेताओं द्वारा दिए गए भड़काउ भाषण का भी जिक्र है। इसमें एक समुदाय विशेष के सफाए से संबंधित बयान भी शामिल है।
याचिकाकर्ता ने हेट स्पीच को लेकर सोशल मीडिया को भी आड़े हाथों लिया है। याचिकाकर्ता ने ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच के प्रसार के लिए सांठगांठ करने का आरोप लगाया। याचिकाकर्ता ने आंकड़ों के साथ पेश की गई अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से यह अपील की है कि अदालत स्वैच्छिक आदर्श आचार संहिता अपनाने का निर्देश दें।
इसके साथ-साथ यातिकाकर्ता ने लोकपाल मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया है। याचिकाकर्ता के अनुसार हेटस्पीच से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग को सतर्क रहने की जरूरत है।
यह भी पढ़ें - आपकी बात: भारत में हेट स्पीच के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
Published on:
16 Nov 2022 12:09 pm
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