
4 साल की महिला ने ठुकराई अमेरिकी नागरिकता(फोटो-X/@nabilajamal_)
Woman Rejects US Citizenship: दुनिया भर में करीब साढ़े तीन करोड़ भारतीय मूल के लोग रहते हैं। उनमें से लाखों ने दूसरे देशों की नागरिकता ले ली है। नई नागरिकता उन्हें अधिकार देती है, सुरक्षा देती है और अवसर देती है। हालांकि, आंध्र प्रदेश की एक 94 साल की बुजुर्ग महिला कोंद्रागुंटा महालक्ष्मीम्मा ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमरीका की नागरिकता को यह कहकर त्याग दिया कि दुनिया का कोई भी पासपोर्ट उस गर्व और सुकून की बराबरी नहीं कर सकता, जो अपनी मातृभूमि की गोद में 'एक भारतीय' के रूप में अंतिम सांस लेने में मिलेगा। हाल में जब भारतीय नागरिकता पाने की औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए महालक्ष्मीम्मा बापटला के कलक्टर कार्यालय में पेश हुईं, तो वहां मौजूद हर शख्स भावुक था। उम्र के अंतिम पड़ाव पर कई उनके लिए नागरिकता सिर्फ कानूनी दर्जा नहीं बल्कि भावनात्मक पहचान का सवाल बन गई थी।
उम्र के इस पड़ाव पर महालक्ष्मीम्मा की आंखें कमजोर हो चुकी हैं और सुनने में भी परेशानी होती है। प्रशासन ने उनके लिए तेलुगु भाषा में शपथ पत्र तैयार कराया। बेटे ने दस्तावेज पढ़कर सुनाए। अधिकारियों ने उन्हें हर कानूनी प्रक्रिया समझाई। फिर वह क्षण आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। कलक्टर की देखरेख में महालक्ष्मीम्मा ने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली। कांपते हाथों से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
महालक्ष्मीम्मा आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के चिंतागुम्पला गांव की रहने वाली हैं। पति नागभूषणम के निधन के बाद वह अपने बेटे, कैंसर विशेषज्ञ डॉ. के. बुचैया चौधरी के पास अमरीका चली गई थीं। परिवार वर्जीनिया के पीटर्सबर्ग में बस गया और वर्ष 2000 में उन्हें अमरीकी नागरिकता मिल गई। 2018 में वह भारत लौट आईं। बेटा भी आंध्र प्रदेश में काम करने लगा। सब कुछ ठीक था। वह अपनी मिट्टी में थीं, मगर कागजों में भारतीय नहीं थीं। यह उन्हेें खल रहा था।
महालक्ष्मीम्मा ने कहा कि मैं 95 साल की होने वाली हूँ। मेरी एकमात्र इच्छा है कि मैं अपने आखिरी दिन अपनी मातृभूमि में एक भारतीय नागरिक के तौर पर बिताऊं। मेरा अंतिम संस्कार मेरे पैतृक गांव में भारतीय के रूप में हो।
बापटला के जिला कलक्टर ने कहा कि यह बहुत भावुक और यादगार पल था। उन्होंने अपनी मर्जी से अमरीकी नागरिकता छोड़ी है। भारतीय नागरिकता की उनकी फाइल अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजी गई है।
Updated on:
27 Jun 2026, 5:06 AM IST
Published on:
27 Jun 2026, 5:06 AM IST
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