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क्या खत्म होने जा रहा है इजरायल-लेबनान संघर्ष? अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ बड़ा समझौता

Israel Lebanon Ceasefire: इजरायल, लेबनान और अमेरिका ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत इजरायल दक्षिणी लेबनान के दो क्षेत्रों से सेना हटाएगा, जबकि हिजबुल्लाह ने इस समझौते को खारिज कर दिया है।
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भारत

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Anurag Animesh

Jun 27, 2026

Israel Lebanon agreement

इजरायल-लेबनान समझौता(फोटो-X/@Breaking911)

Israel Lebanon Agreement: इजरायल, लेबनान और अमेरिका ने सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। महीनों से जारी संघर्ष के बाद इसे दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस समझौते को हिजबुल्लाह ने सिरे से खारिज कर दिया है। चार दिनों तक वॉशिंगटन में चली बातचीत के बाद यह समझौता हुआ। यह उस समय सामने आया है, जब 60 दिन के युद्धविराम की अवधि शुरू हुए कुछ ही दिन हुए हैं। समझौते के तहत इजरायल दक्षिणी लेबनान के दो इलाकों से अपनी सेना हटाएगा, जबकि वहां लेबनानी सेना सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी। इस त्रिपक्षीय समझौते पर इजरायल के राजदूत येचिएल लेइटर, अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह और अमेरिकी विदेश विभाग के चीफ ऑफ स्टाफ डैन हॉलर ने हस्ताक्षर किए।

अमेरिका बोला- यह सिर्फ शुरुआत है


समझौते के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही कहा कि आगे की राह आसान नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत की शुरुआत है। अभी बहुत काम बाकी है और चुनौतियां भी कम नहीं हैं। फिर भी यह दोनों देशों के लिए शांति और सुरक्षा की दिशा में अहम कदम है। रुबियो ने कहा कि लंबे समय से संघर्ष झेल रहे इजरायल और लेबनान के लोग शांति और सुरक्षित जीवन के हकदार हैं।

लेबनान ने बताया संप्रभुता बहाली की दिशा में कदम


अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह ने कहा कि यह समझौता देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बहाल करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करना, विस्थापित लोगों को उनके घर लौटाना और नागरिकों को शांति एवं सुरक्षा देना है।

इजरायल ने क्या कहा?


इजरायल के अमेरिका स्थित राजदूत येचिएल लेइटर ने कहा कि इस समझौते का अंतिम लक्ष्य दोनों देशों के बीच स्थायी और वास्तविक शांति स्थापित करना है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में ईरान और हिजबुल्लाह की कोई भूमिका नहीं होगी और अब शांति की राह खुल रही है।

वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते को इजरायल की सुरक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि और ईरान के लिए बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य दबाव बनाकर इजरायल को दक्षिणी लेबनान से हटाना चाहता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया केवल तीनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर आगे बढ़ेगी। हालांकि नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हिजबुल्लाह पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता, तब तक इजरायल दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा।

समझौते में क्या-क्या तय हुआ?

समझौते के तहत इजरायल दक्षिणी लेबनान के दो ऐसे क्षेत्रों से सेना हटाएगा, जिन्हें अब रणनीतिक रूप से आवश्यक नहीं माना जा रहा है। इनमें एक इलाका लितानी नदी के उत्तर में और दूसरा दक्षिण में स्थित है।

इन क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेबनानी सेना को दी जाएगी। यह व्यवस्था एक पायलट कार्यक्रम के तहत लागू होगी। इजरायल का कहना है कि आगे और सैनिक वापसी तभी होगी, जब दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह का सैन्य ढांचा हटेगा और सुरक्षा हालात में सुधार होगा।

हिजबुल्लाह ने समझौते को किया खारिज


वॉशिंगटन में हुई वार्ता में हिजबुल्लाह शामिल नहीं था। समझौते के बाद संगठन ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। हिजबुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि लेबनान सरकार एकतरफा रियायतें दे रही है, जिससे देश कमजोर होगा और इसका फायदा इजरायल को मिलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह समझौता लेबनान के भीतर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक विभाजन पैदा कर सकता है।

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