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डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कबूल किया बड़ा गुनाह, अब हो सकती है 5 साल तक की सजा

John Bolton News: जॉन बोल्टन ने ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा की गोपनीय जानकारी रखने का आरोप कबूल लिया है। पढ़ें पूरी खबर
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भारत

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Mukul Kumar

Jun 26, 2026

John Bolton News

जॉन बोल्टन। (फोटो - वॉशिंगटन पोस्ट)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को पांच साल तक जेल की सजा हो सकती है। उन्होंने संघीय अदालत में शुक्रवार को सुरक्षा से जुड़े मामले में अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

उन्होंने व्हाइट हाउस में अपने समय का संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जानकारी रखने का आरोप स्वीकार किया। यह मामला अमेरिकी राजनीति में तूफान ला सकता है।

गोपनीय जानकारी अपने पास रखने का आरोप

बोल्टन पर आरोप था कि उन्होंने पद पर रहते हुए मिली गोपनीय जानकारियां अपने पास रख लीं। अदालत में पेश हुए समझौते के तहत अब उन्हें 5 साल तक की जेल हो सकती है।

साथ ही उन्हें 22.5 लाख डॉलर यानी करीब 1.9 करोड़ रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ेगा। उनकी सजा का ऐलान 28 अक्टूबर को होगा।

काफी विवादों में रहे हैं बोल्टन

यह घटना अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। जॉन बोल्टन ट्रंप प्रशासन में काफी विवादास्पद चेहरा रहे हैं। वे हमेशा सख्त रुख के लिए जाने जाते थे।

खासकर ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के मामले में हमेशा उन्हें तल्ख देखा गया है। अब खुद उन्हीं पर गोपनीय दस्तावेज रखने का आरोप लगा है।

कैसे शुरू हुआ यह मामला?

सूत्रों के मुताबिक, बोल्टन के कार्यकाल के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फाइलें और जानकारी उनके पास बनी रहीं जो उन्हें लौटानी चाहिए थी।

जांच एजेंसियों ने जब इसकी पुष्टि की तो मामला अदालत तक पहुंच गया। कई महीनों की कानूनी लड़ाई के बाद अंत में बोल्टन ने दोष स्वीकार कर लिया।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह घटना ट्रंप प्रशासन के पूर्व अधिकारियों पर दबाव बढ़ा सकती है। बोल्टन पहले भी ट्रंप की कई नीतियों से असहमति जता चुके हैं और किताब भी लिखी थी। लेकिन इस बार मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा का है, जो बेहद संवेदनशील है।

अमेरिका में सुरक्षा उल्लंघन की बढ़ती घटनाएं

पिछले कुछ सालों में अमेरिका में पूर्व अधिकारियों द्वारा गोपनीय दस्तावेज रखने के कई मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में सजा भी हुई है। बोल्टन का केस इसलिए अलग है क्योंकि वे काफी ऊंचे पद पर थे और उनकी पहुंच बेहद संवेदनशील जानकारी तक थी।

सुरक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मामलों से देश की खुफिया एजेंसियों को नुकसान पहुंच सकता है। अगर गोपनीय जानकारी गलत हाथों में चली जाती है तो दुश्मन देश इसका फायदा उठा सकते हैं।