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सेक्स करने के लिए आधार कार्ड की नहीं है जरूरत! हाईकोर्ट ने दिया अहम फैसला

सेक्स यानी यौन संबंध बनाने को लेकर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक, शारीरिक संबंध बनाने के लिए किसी आधार कार्ड या फिर पेन कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती है। विस्तार से जानिए क्या है मामला।

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Aadhar Card For Sex Not Required Delhi High Court Honeytrap False Rape Case

Aadhar Card For Sex Not Required Delhi High Court Honeytrap False Rape Case

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट ने आपसी सहमति से सेक्स के मामले में अहम टिप्पणी की है। इसके मुताबिक, कोर्ट ने कहा है कि यदि दो लोग आपसी सहमति से शारीरिक संबंध या यौन संबंध बना रहे हैं तो उन्हें एक दूसरे का आधार कार्ड या फिर पैन कार्ड देखने की जरूरत नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी रेप के एक मामले में सुनवाई के दौरान की है। खास बात यह है कि, कोर्ट ने इस मामले में इस टिप्पणी के साथ आरोपी को जमानत भी दे दी है।

क्या है पूरा मामला?
एक महिला ने बलात्कार का केस लगाकर एक शख्स के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। केस दर्ज करवाते वक्त महिला ने शिकायत में ये भी कहा कि जब दोनों के बीच पहली बार सेक्स हुआ तो उस वक्त वह नाबालिग थी।
पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया। वहीं मामले में जमानत को लेकर आरोपी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पीड़ित महिला के बयानों में विरोधाभास है यानी हर बार उसका बयान अलग है। वहीं आरोपी के वकील ने कोर्ट में बताया कि महिला ने 3 आधार कार्ड बनवाए हुए हैं और तीनों में जन्म की तारीख और वर्ष में भी डिफरेंस है।

आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि, महिला ने आरोपी को हनीट्रैप में फंसाने के लिए उस आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जिससे आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट लग सके।

इसके साथ ही वकील ने कोर्ट को महिला का वो आधार कार्ड भी दिखाया, जिसके मुताबिक शारीरिक संबंध के दौरान वो वयस्क थी। जो साबित करता है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने।

इस वजह से भी कोर्ट ने आरोपी को दी जमानत
इस मामले में हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि पीड़िता के बैंक खाते में बड़ी रकम जमा की गई है, जिससे यह मामला हनीट्रैप का भी हो सकता है।

साथ ही कोर्ट ने इस पर भी सवाल खड़े किए कि पीड़िता ने मामले में एफआईआर कई महीने की देरी से दर्ज क्यों कराई?

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर को विस्तार से मामले की जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस को यह भी पता लगाने के को कहा है कि महिला ने क्या इससे पहले किसी और के खिलाफ भी ऐसी ही शिकायत की है।

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