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Inspiring: बंदरों की सेवा ने बदली किस्मत, जानें कौन हैं अहमदाबाद के ये ‘मंकी मैन’

Animal Kindness: 17 साल पहले शुरू हुआ जानवरों की सेवा का सफर आज एक बड़े मिशन में बदल चुका है। अहमदाबाद के एक शख्स ने बंदरों और अन्य जीवों की सेवा को ही अपना जीवन लक्ष्य बना लिया है।

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भारत

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MI Zahir

Mar 24, 2026

Monkey Man of Ahmedabad

अहमदाबाद का मंकी मैन। (फोटो: AI)

Selfless Animal Service: बंदरों के साथ अटूट रिश्ता (Monkey Man of Ahmedabad) अहमदाबाद की गलियों में एक शख्स ऐसा है जिसे दुनिया 'मंकी मैन' (Monkey Man) के नाम से जानती है। यह कहानी (Inspirational Story) उस बदलाव की है जो निस्वार्थ सेवा (Selfless Service) से उपजा है। 17 साल पहले जब उन्होंने पहली बार एक भूखे जानवर (Feeding Animals) को खाना खिलाया था, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि यही करुणा (Acts of Kindness) एक दिन उनकी पहचान बन जाएगी। आज उनका जीवन पूरी तरह से इन बेजुबानों के लिए समर्पित हो चुका है।

सेवा की शुरुआत और जीवन में बदलाव (Life Changing Journey)

शुरुआत बहुत सामान्य थी, लेकिन धीरे-धीरे यह एक जुनून बन गया। उन्होंने महसूस किया कि जब हम प्रकृति और उसके जीवों के प्रति दया भाव रखते हैं, तो हमारा अपना जीवन भी सकारात्मक रूप से बदलने लगता है। उनके अनुसार, जानवरों की सेवा करने से उन्हें जो मानसिक शांति और संतोष मिला, वह किसी भी धन-दौलत से बढ़कर है। आज वे हर दिन घंटों का समय इन बंदरों के बीच बिताते हैं।

बेजुबानों के प्रति करुणा (Animal Welfare)

'मंकी मैन' का मानना है कि शहर के विस्तार के कारण जानवरों के प्राकृतिक आवास खत्म हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें भोजन और पानी के लिए भटकना पड़ता है। वे न केवल उन्हें फल और रोटियां खिलाते हैं, बल्कि उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखते हैं। स्थानीय लोग अब उन्हें एक रक्षक के रूप में देखते हैं, जो बंदरों के साथ एक अनूठा संवाद स्थापित कर चुके हैं।

समाज के लिए एक संदेश (Message to Society)

यह कहानी केवल खाना खिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान और जानवर के बीच के गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। उनका कहना है कि अगर हर व्यक्ति अपने सामर्थ्य अनुसार एक भूखे जीव की मदद करे, तो दुनिया रहने के लिए एक बेहतर जगह बन सकती है। उनकी इस मुहिम ने कई युवाओं को भी जीव सेवा के प्रति प्रेरित किया है।

समाज के असली हीरो (Real Hero of Society)

यह खबर मानवीय संवेदनाओं को जगाने वाली है। सोशल मीडिया पर लोग इसे "असली हीरो" की संज्ञा दे रहे हैं। क्या स्थानीय प्रशासन या एनजीओ उनके इस मिशन में मदद के लिए आगे आएंगे? आने वाले समय में उनके इस सेवा कार्य के विस्तार पर नजर रहेगी।