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Patrika Explainer: लोकसभा की सीटें बढ़ने पर क्या बदल जाएंगे राजनीतिक समीकरण, क्यों कर रही दक्षिण भारत की पार्टियां विरोध

दक्षिण भारत की पार्टियां परिसीमन का विरोध करती आई हैं। आखिर क्या है इसके पीछे की वजह। सरकार ने इसका समाधान निकालने की क्या कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर...

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MK STalin

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Photo - IANS)

Lok Sabha seats increase to 816: केंद्र सरकार साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद की मौजूदा सत्र में दो बिल ला जा सकते हैं। वहीं, इस विधेयक के पास होते ही लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी। परिसीमन में बदलाव और सीटों की संख्या में इजाफे का दक्षिण भारत की पार्टियां विरोध करती आई हैं। उनका मानना है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन में बदलाव और सीटों के संख्या में इजाफा उत्तर व दक्षिण भारत में समानुपातिक नहीं होगा। इससे केंद्रीय राजनीति में दक्षिण भारत का प्रभाव घट जाएगा। इसके कारण केंद्र में बनने वाली कोई भी सरकार उन पर ध्यान नहीं देगी।

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशवर्तमान सीटेंप्रस्तावित सीटें (महिला आरक्षित सहित)
उत्तर प्रदेश80120 (40 महिला)
महाराष्ट्र4872 (24 महिला)
पश्चिम बंगाल4263 (21 महिला)
बिहार4060 (20 महिला)
तमिलनाडु3959 (20 महिला)
मध्य प्रदेश2944 (15 महिला)
अरुणाचल प्रदेश23
गोवा23
मणिपुर23
मेघालय23
त्रिपुरा23
मिजोरम12
नागालैंड12
सिक्किम12
दिल्ली (केंद्र शासित प्रदेश)711 (4 महिला)
जम्मू-कश्मीर58 (3 महिला)
कुल प्रस्तावित सीटें: 816 (जिनमें 273 महिलाओं के लिए आरक्षित)

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की बैठक

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को इसे लेकर विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक भी की थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने विपक्षी दलों के सामने यह प्रस्ताव रखा है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर नया परिसीमन तैयार किया जाता है तो लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाए। एक्सप्रेस को मीटिंग में मौजूद एक सांसद ने बताया कि बढ़ाई गई 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।

जानकारी के मुताबिक, लोकसभा की सीटों में इजाफा करने को लेकर सरकार गंभीर है। गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान संसद भवन में बीजू जनता दल, युवाजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार), शिवसेना (उबाठा) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेताओं के साथ मुलाकात की। वहीं, शाह कांग्रेस के नेताओं के साथ अलग से मुलाकात कर सकते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट कि शाह की मीटिंग में विपक्षी दलों के नेताओं को बताया गया कि जनगणना का काम 2029 के बाद तक भी चल सकता है, इसलिए लोकसभा और विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी, परिसीमन आयोग अधिनियम और महिला आरक्षण अधिनियम में संवैधानिक संशोधन के जरिए की जा सकती है।

क्यों कर रही हैं दक्षिण भारत की पार्टियां विरोध

दक्षिण के राज्य (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) की सरकारों और वहां के क्षेत्रीय दलों (DMK, TDP, AIADMK व अन्य) का कहना है कि वहां परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को बहुत अच्छे से लागू किया। इनकी कुल प्रजनन दर (TFR) राष्ट्रीय औसत (लगभग 2.0-2.2) से काफी कम है। तमिलनाडु और केरल में 1.7-1.8 के आसपास है। जबकि, उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान में प्रजनन दर TFR 2.7-3.4 तक है। अगर सिर्फ जनसंख्या के आधार पर सीटें बांटी गईं, तो दक्षिण के राज्यों की लोकसभा सीटें घट सकती हैं, जबकि उत्तर के राज्यों की बढ़ जाएंगी। दक्षिण भारत के राज्य इसे अच्छे काम की सजा की तौर पर देखते हैं।

राज्य / केंद्र शासित प्रदेशलोकसभा सीटें
उत्तर प्रदेश80
महाराष्ट्र48
पश्चिम बंगाल42
बिहार40
तमिलनाडु39
मध्य प्रदेश29
कर्नाटक28
गुजरात26
आंध्र प्रदेश25
राजस्थान25
ओडिशा21
केरल20
तेलंगाना17
असम14
झारखंड14
पंजाब13
छत्तीसगढ़11
हरियाणा10
दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)7
जम्मू-कश्मीर5
उत्तराखंड5
हिमाचल प्रदेश4
अरुणाचल प्रदेश2
गोवा2
मणिपुर2
मेघालय2
त्रिपुरा2
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह1
चंडीगढ़1
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव2
लक्षद्वीप1
लद्दाख1
मिजोरम1
नागालैंड1
पुदुचेरी1
सिक्किम1
वर्तमान में राज्यवार लोकसभा की सीटें: कुल सीटें- 543

क्या दक्षिण भारत की क्षेत्रीय पार्टियों की समस्याओं का होगा समाधान

मोदी सरकार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी के एक सांसद ने कहा कि सरकार 2011 के जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या में बढ़ोतरी की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में उसी अनुपात में सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इससे दक्षिण भारत के राज्यों की उस आशंका का समाधान हो जाएगा। जिसमें वह आबादी के अनुपात में सीटों की बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।