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दिल्ली ब्लास्ट मामले में चर्चा में रही अल-फलाह यूनिवर्सिटी, चेयरमैन की बढ़ी मुसीबत, और 14 दिन जेल ही रहेगा ठिकाना

Al-Falah University Chairman Arrest: अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम दिल्ली बम ब्लास्ट केस के बाद चर्चा में आया था, अब उसी यूनिवर्सिटी के चेयरमैन को दूसरे PMLA केस में 14 दिन के लिए ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया है।

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भारत

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Saurabh Mall

Apr 04, 2026

AL FALAH UNIVERSITY

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी गिरफ्तार (सोर्स: आईएएनएस)

Al-Falah University Chairman 14 days Judicial Custody: दिल्ली ब्लास्ट केस के बाद सुर्खियों में आई अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है। यूनिवर्सिटी अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत पूरी होने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें दूसरे PMLA केस में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यानी अब अगले दो हफ्ते उनका ठिकाना जेल ही रहेगा।

क्या है मामला?

बता दें यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) से जुड़ा है और अब इसकी जांच नए चरण में पहुंच गई है। दिल्ली की एक कोर्ट ने अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने राजधानी में करीब 45 करोड़ रुपये की जमीन को धोखाधड़ी से हासिल किया।

सिद्दीकी को 24 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद 25 मार्च से उन्हें 10 दिन की ED कस्टडी में रखकर पूछताछ की गई। जब यह कस्टडी खत्म हुई, तो उन्हें कोर्ट में पेश किया गया।

कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 17 अप्रैल तक जेल भेजने का फैसला लिया।

जांच में क्या पता चला?

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। आरोप है कि जमीन हथियाने के लिए नकली दस्तावेज तैयार किए गए और उनके जरिए कब्जा किया गया। इस काम में डायरेक्टर जवाद अहमद सिद्दीकी ने कुछ लोगों के साथ मिलकर साजिश रची।

दरअसल, ये पूरा मामला विवादित जमीन दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में करीब 1.14 एकड़ का है, जिसकी कीमत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि कागजों में इस जमीन की कीमत सिर्फ 75 लाख रुपये दिखाई गई।

सिद्दीकी पहले भी कई मामलों में घिर चुके हैं। नवंबर 2025 में ED ने उन्हें स्टूडेंट्स के साथ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने 2018 से 2025 के बीच सैकड़ों करोड़ रुपये कमाए और छात्रों के पैसों का गलत इस्तेमाल किया। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी पर NAAC और UGC की मान्यता को लेकर भी झूठे दावे करने के आरोप हैं, जिससे छात्र गुमराह हुए।