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DU के कॉलेज में छात्राओं को ‘विकसित भारत’ कार्यक्रम के लिए रोके जाने का आरोप, बाहर जाने की इजाजत नहीं

Viksit Bharat Indraprastha College: दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंद्रप्रस्थ कॉलेज में छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें ‘विकसित भारत’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जबरन एक घंटे तक परिसर में रोका गया। गेट बंद कर बाहर जाने से रोका गया, विरोध के बाद ही उन्हें निकलने दिया गया।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 11, 2026

Viksit Bharat Indraprastha College Controversy

Viksit Bharat Indraprastha College Controversy(AI Image-Patrika)

Viksit Bharat Indraprastha College Controversy: दिल्ली के University of Delhi के अंतर्गत आने वाले Indraprastha College for Women में 8 अप्रैल को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने छात्राओं के बीच नाराजगी पैदा कर दी है। कई छात्राओं का आरोप है कि उन्हें कॉलेज परिसर के अंदर ही करीब एक घंटे तक रोककर रखा गया और बाहर जाने नहीं दिया गया। छात्राओं का कहना है कि यह सब उन्हें केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत’ पहल से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल करने के लिए किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज के ऑडिटोरियम में चल रहा था, जबकि कुछ छात्राएं उस समय कॉलेज से बाहर निकलना चाहती थीं।

गेट बंद, बाहर जाने की इजाजत नहीं


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना दोपहर के समय की बताई जा रही है। छात्राओं के मुताबिक, जैसे ही वे बाहर जाने के लिए मुख्य गेट पर पहुंचीं, उन्हें पता चला कि गेट बंद कर दिया गया है। सुरक्षा गार्ड्स ने उन्हें बाहर जाने के बजाय ऑडिटोरियम की तरफ जाने को कहा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ छात्राएं गार्ड्स से बहस करती दिख रही हैं। कुछ छात्राएं यह कहती सुनाई देती हैं कि उन्हें घर जाना है, किसी की फैमिली इमरजेंसी है। वहीं गार्ड यह कहते नजर आते हैं कि प्रिंसिपल के निर्देश हैं और सभी को कार्यक्रम में शामिल होना होगा। एक छात्रा वीडियो में यह भी कहती सुनाई देती है कि उसके माता-पिता लगातार फोन कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि वह बाहर क्यों नहीं आ पा रही।

विरोध के बाद खुले गेट


छात्राओं का दावा है कि जब बड़ी संख्या में छात्राएं गेट पर इकट्ठा हो गई और विरोध जताया, तब जाकर गेट खोला गया। इससे पहले उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।छात्राओं ने यह भी बताया कि उसी दिन कॉलेज में कई और कार्यक्रम भी चल रहे थे। उनका आरोप है कि प्रशासन चाहता था कि सभी कार्यक्रमों में पर्याप्त भीड़ दिखे, इसलिए छात्राओं पर शामिल होने का दबाव बनाया गया।

‘अटेंडेंस के लिए मजबूरी’ का पुराना मुद्दा


छात्राओं ने यह भी कहा कि कॉलेज में इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं। उनका दावा है कि अक्सर उन्हें अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए कहा जाता है और कई बार उसी के आधार पर क्लास की अटेंडेंस भी लगाई जाती है।