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महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर कांग्रेस का आया बयान, कहा- हम विधेयक के खिलाफ नहीं, असली मुद्दा परिसीमन है

कांग्रेस ने कहा कि हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि असली मुद्दा परिसीमन है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार जल्दबाजी में निर्णय लेना चाहती है, जबकि परिसीमन एक संवेदनशील विषय है। पढ़ें पूरी खबर...

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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के लिए जाते मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी व अन्य नेता।

Women's Reservation Bill: कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि असली मुद्दा परिसीमन है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि परिसीमन के गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की करीब तीन घंटे बैठक हुई, जिसमें 16 से 18 अप्रेल तक बुलाए जा रहे संसद के विशेष सत्र पर चर्चा हुई। बैठक में अगले सप्ताह विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन के मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने का निर्णय किया गया।

खरगे ने साफ कहा कि सरकार जल्दबाजी में निर्णय लेना चाहती है, जबकि परिसीमन एक संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाला विषय है। पार्टी के मुताबिक, महिला आरक्षण को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन को शर्त बनाना ही पूरे विवाद की जड़ है। खरगे ने याद दिलाया कि उन्होंने 21 सितंबर 2023 को राज्यसभा में अपने भाषण में महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू करने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने जातिगत जनगणना की भी वकालत की थी।

चुनावी फायदे के लिए विशेष सत्र

कांग्रेस ने 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाए गए संसद के विशेष सत्र पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह सत्र चुनावों के बीच बुलाया गया है, जो आचार संहिता की भावना के खिलाफ है। इसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ लेना है। खरगे ने दावा किया कि सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और विधानसभाओं की सीटों में भी बढ़ोतरी का प्रस्ताव ला सकती है।

सर्वदलीय सहमति जरूरी

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री को कई बार पत्र लिखकर आग्रह किया था कि चुनाव खत्म होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और आम सहमति बनाई जाए। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नजरअंदाज कर दिया।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

  • 29 अप्रेल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
  • सरकार औपचारिक प्रस्ताव सभी दलों के सामने रखे।
  • विधानसभा चुनावों के बाद इस मुद्दे पर चर्चा हो, महिला आरक्षण को बिना देरी और सही तरीके से लागू हो।
  • परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श हो।