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‘महिलाएं बदल रहीं सत्ता की स्क्रिप्ट’, असम, केरल और पुद्दुचेरी में बदलेगी कुर्सी?

मौजूदा दौर में महिला वोटर्स की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हालिया वर्षों में हुए कुछ चुनाव में महिलाओं ने निर्णायक की भूमिका निभाई है। असम, केरल और पुद्दुचेरी में होने वाले चुनाव में क्या महिला वोटर्स अहम भूमिका निभाएंगी, आइए समझते हैं।

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भारत

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Vinay Shakya

Apr 11, 2026

Women standing in line to cast their votes

वोट डालने के लिए लाइन में खड़ी महिलाएं (Photo- IANS)

भारतीय चुनावी राजनीति में एक गहरा बदलाव अब साफ नजर आने लगा है। महिला मतदाता, जो कभी कम भागीदारी के कारण हाशिए पर रहती थीं। अब वह मौजूदा दौर के चुनावी नतीजों की दिशा तय करने वाली सबसे मजबूत ताकत बन चुकी हैं। मध्यप्रदेश और बिहार के बाद अब असम, केरल और पुदुचेरी के विधानसभा चुनाव इसी बदलाव के अगले पड़ाव पर हैं। इन चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से आगे रहा और नतीजों को प्रभावित करने की पूरी संभावना है।

महिला वोटर्स की भागीदारी बढ़ी

महिला वोटर्स का मतदान प्रतिशत बढ़ना केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि राजनीतिक व्यवहार में गहरा परिवर्तन है। कई राज्यों में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया। कई सीटों पर जीत-हार में महिला वोट निर्णायक साबित हुए। हालिया आंकड़ों के अनुसार, केरल में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 81.19% रहा, जबकि पुरुषों का 75.19% रहा है। असम में महिलाओं की भागीदारी 86.50% रही, जो पुरुषों के मतदान प्रतिशत 85.33% से थोड़ी ज्यादा थी। इसी तरह पुद्दुचेरी में भी महिलाओं का टर्नआउट 91.40 तक पहुंचा। पुद्दुचेरी में पुरुषों का टर्नआउट 88.13 रहा है।

क्यों बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी?

चुनाव में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इस बदलाव के पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की लक्षित कल्याणकारी योजनाओं (फ्रीबी) की बड़ी भूमिका रही है। मुफ्त राशन, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, नकद ट्रांसफर, छात्राओं के लिए साइकिल-स्कूटी, बिजली बिल राहत और पेंशन जैसी योजनाओं ने महिलाओं को सीधे लाभार्थी बनाया।

महिलाएं साइलेंट स्विंग फैक्टर

केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रहीं फ्रीबी योजनाओं (फ्री में मिलने वाली सुविधाएं) ने महिलाओं के निजी और परिवारिक जीवन पर सकारात्मक असर डाला है। महिलाएं अब साइलेंट स्विंग फैक्टर बन चुकी हैं। वे किसी एक दल की स्थायी वोट बैंक नहीं हैं, बल्कि मुद्दों और लाभ के आधार पर फैसला लेती हैं।

घोषणापत्र से लेकर जमीनी प्रचार तक सभी पार्टियां अब सबसे ज्यादा महिलाओं को साधने की कोशिश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साइलेंट रेवोल्यूशन भारतीय राजनीति को अधिक जवाबदेह और समावेशी बना रहा है। महिलाएं अब सिर्फ वोट नहीं दे रही, बल्कि चुनावी एजेंडे को भी आकार दे रही हैं। असम, केरल और पुदुचेरी के परिणाम 4 मई को घोषित होंगे। इन राज्यों में महिलाओं की ताकत बदलाव ला सकती है।