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अमरनाथ यात्रा: गुफा के बदलते माइक्रोक्लाइमेट पर उठा सवाल, एक्सपर्ट्स मान रहे चेतावनी का संकेत

Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बीच गुफा के बदलते माइक्रोक्लाइमेट पर सवाल भी उठ रहा है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 11, 2026

Amarnath Yatra: changing microclimate of cave

अमरनाथ यात्रा: पवित्र हिमलिंग की पिछली बर्फ (Photo - IANS)

पहलगाम आतंकी हमले के डर को पीछे छोड़ते हुए इस साल अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। यात्रा के पहले 6 दिनों में ही 1.42 लाख से ज़्यादा भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। लेकिन आस्था के इस उत्सव के बीच एक सवाल भी तेज़ी से उठ रहा है। 57 दिनों तक चलने वाली यात्रा शुरू होने के सिर्फ 5 दिन में ही आखिर क्यों पवित्र हिमलिंग का आकार अत्यंत छोटा हो गया और बर्फ पिघल गई? एक्सपर्ट्स का कहना है कि यात्रा प्रबंधन, पर्यावरणीय संरक्षण और श्रद्धालुओं की संख्या के वैज्ञानिक नियमन पर गंभीरता से विचार करना होगा।

प्राकृतिक संतुलन का प्रतीक हिमलिंग

समुद्र तल से करीब 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिमलिंग एक प्राकृतिक ‘आइस स्टैलेग्माइट’ है। गुफा में तापमान, नमी और जल की बूंदों के जमने की प्रक्रिया से यह बनता है। गुफा के सूक्ष्म पर्यावरण यानी माइक्रोक्लाइमेट में मामूली बदलाव भी इसके आकार को प्रभावित कर सकता है।

कभी 40-45 दिन तक बाबा बर्फानी देते थे दर्शन

एक समय ऐसा था जब बाबा बर्फानी 40 से 45 दिनों तक श्रद्धालुओं को दर्शन देते थे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में यह अवधि लगातार घटती दिखी है। वर्ष 2018, 2022 और 2024 में भी हिमलिंग अपेक्षा से पहले पिघल गया था, लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने के 5 दिनों में हिमलिंग का पिघल जाना चिंता बढ़ाने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।

एक्सपर्ट्स मान रहे चेतावनी का संकेत

एक्सपर्ट्स इसे चेतावनी का संकेत मान रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने इसके 3 कारण बताए हैं। पहला कारण है कि दुनिया के अन्य पहाड़ों की तुलना में हिमालय का यह संवेदनशील हिस्सा बहुत तेज़ी से गर्म हो रहा है। मौसम का बदलता मिज़ाज और गुफा के भीतर बढ़ती उमस पवित्र हिमलिंग को समय से पहले पिघला रही है। दूसरा कारण है कि यात्रा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण, बिजली, सोलर लाइटिंग, 'रेन शेल्टर' और प्रस्तावित 'रोपवे प्रोजेक्ट' को लेकर भी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनसे निकलने वाली कृत्रिम गर्मी गुफा के तापमान को बढ़ा रही है। तीसरा कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार प्रतिदिन सिर्फ 10,000 श्रद्धालुओं को ही आगे जाने की अनुमति है। इसके बावजूद हज़ारों की संख्या में गैर-पंजीकृत श्रद्धालु बिना अनिवार्य मेडिकल सर्टिफिकेट और आरएफआइडी कार्ड के पहुंच रहे हैं।