
लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीट कम होने का विश्लेषण विशेषज्ञ अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं। हाल ही एक विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि जिन लोकसभा क्षेत्रों में गरीबी कम करने के प्रयास हुए, वहां भाजपा को नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में भी कई बार पिछले दशक में अनुमानित 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर लाने में सरकार की भूमिका के बारे में चर्चा की।
2015-16 के बाद से 517 लोकसभा सीटों पर गरीबों की आबादी में गिरावट देखी गई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसवी सुब्रमण्यन के नेतृत्व वाली एक टीम के डेटाबेस से पता चला है कि बहुआयामी गरीबी में रहने वाली आबादी का हिस्सा 517 सीटों पर गिरा और केवल 26 निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़ा है। जिन 26 सीटों पर 2015-16 के बाद गरीबी बढ़ी, उनमें से केवल छह सीटों के लोगों ने इस बार अलग पार्टी को वोट दिया। बाकी 2019 की अपनी पसंद पर कायम रहे।
हालांकि, केवल सात सीटों पर गरीबी में 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई। मेघालय के शिलांग में 6.01 प्रतिशत अंक की सबसे अधिक वृद्धि देखी गई। इसके बाद बिहार के पटना साहिब में 4.52 प्रतिशत अंक की वृद्धि देखी गई। छह सीटें ऐसी हैं जहां आधी से अधिक आबादी बहुआयामी गरीबी में जी रही है। इनमें तीन बिहार में, दो उत्तर प्रदेश में और एक झारखंड में है। इनमें से पांच सीटों पर मतदाताओं ने 2019 की तरह उसी पार्टी को फिर से चुना। केवल यूपी का श्रावस्ती ही बदलाव हुआ।
30 सीटें छीनने में सफल रही भाजपा
भाजपा ने अपने सहयोगियों जनता दल (यूनाइटेड), जनता दल (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को तीन सीटें छोड़ दीं, जिनमें से सभी ने जीत हासिल की। हालांकि, भाजपा प्रतिद्वंद्वी पार्टियों से 30 सीटें छीनने में सफल रही, जिसमें बीजू जनता दल (बीजेडी) की 12 और कांग्रेस की छह सीटें शामिल थीं। इनमें से एक निर्वाचन क्षेत्र पर 2019 में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार भाजपा ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
गरीबी घटने वाली सीटों का सियासी गणित
संबंधित विषय:
Updated on:
21 Jun 2024 07:33 am
Published on:
21 Jun 2024 07:30 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
