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Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने साफ शब्दों में लोगों को भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कोई कमी नहीं होने वाली है। सरकार का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) भी इस पूरे मामले में सक्रिय है। कोशिश यही है कि उद्योगों का काम बिना रुकावट चलता रहे और आम लोगों तक जरूरी ईंधन समय पर पहुंचता रहे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एलपीजी और दूसरे ईंधनों की सप्लाई को सुचारु बनाए रखने के लिए कुछ अस्थायी राहत उपाय लागू किए गए हैं।
इन उपायों के तहत केरोसिन स्टोरेज की सीमा बढ़ाई गई है, एलपीजी उतारने की प्रक्रिया को आसान किया गया है और एलएनजी फिलिंग के लिए नई गाइडलाइंस लागू की गई हैं। इतना ही नहीं, गैस सिलेंडर की डिलीवरी में पारदर्शिता लाने के लिए 94 प्रतिशत तक DAC सिस्टम लागू कर दिया गया है, जिससे गड़बड़ी और कालाबाजारी पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। सरकार का दावा है कि देशभर में घरेलू एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। खास बात यह है कि छोटे 5 किलो वाले गैस सिलेंडर की मांग तेजी से बढ़ी है। 23 मार्च 2026 के बाद से अब तक 20 लाख से ज्यादा ऐसे सिलेंडर बिक चुके हैं। ये खासतौर पर प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए इनकी सप्लाई भी दोगुनी कर दी गई है।
वहीं, पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG को लेकर भी काम तेज हो गया है। पिछले कुछ हफ्तों में ही करीब 5.10 लाख नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके अलावा लाखों नए कनेक्शन के लिए तैयारी पूरी हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग इसके लिए आवेदन भी कर रहे हैं। सरकार कंपनियों के साथ मिलकर लोगों को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, और कई जगहों पर ऑफर भी दिए जा रहे हैं। सरकार ने राज्यों को भी साफ निर्देश दिए हैं कि गैस कनेक्शन देने की प्रक्रिया को तेज किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह सुविधा पहुंच सके। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे घबराहट में आकर ईंधन की अतिरिक्त खरीदारी न करें और सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा रखें। इसके अलावा, वैकल्पिक ईंधनों जैसे PNG और इलेक्ट्रिक कुकटॉप के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में ईंधन पर दबाव कम किया जा सके।
Published on:
22 Apr 2026 10:42 pm
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