
3 अप्रैल, 1984...शाम के 6 बजकर 38 मिनट हो रहे थे...कि रूस का हिस्सा रहे कजाकिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष स्टेशन के लांच पैड नंबर 31 पर तैयार राकेट में एक रौशनी कौंधी और यह तवारीख बन गई। भारत रूस के दोस्ती के और दुनिया के साथ भारत के अंतरिक्ष में दबदबे की। ये वो तारीख है जो इतिहास में नहीं अंतरिक्ष में दर्ज है। ये वो तारीख है जिसने दुनिया को बता दिया कि अंतरिक्ष की दौड़ में हम पीछे नहीं बल्कि हम अभिन्न अंग हैं।
आज के ही दिन स्कवाड्रन लीडर राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में स्पेश स्टेशन पहुंचे। यूं तो पटियाला राजघराने, शूट और पैग लिए मशहूर रहा है लेकिन यह वो दिन है जिस दिन कुछ अलग ही स्वैग था। पटियाला बॉय अब अंतरिक्ष का किंग बन चुका था। चारो तरफ जश्न ही जश्न का माहौल था। इस जश्न के बीच सीधे अंतरिक्ष से बात चल रही थी।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, रूसी अधिकारी और अंतरिक्ष में पहुंचे दल से संयुक्त कांफ्रेंस में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से पूछा, "अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है". जिसके जवाब में शर्मा ने कहा...सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा'. यह वही शब्द हैं जिनसे आज भी हर भारतीय का सीना गर्व से फूल जाता है। इस बातचीत को बेहद ही ऐतिहासिक माना जाता है।
राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को पटियाला में हुआ था। वह आज भी अंतरिक्ष में कदम रखने वाले एकमात्र भारतीय हैं। 20 सितंबर 1982 को इसरो ने उन्हें अंतरिक्ष में भेजने के लिए चुना था। 2 अप्रैल के दिन शर्मा ने सोवियत संघ के बैकानूर से सोयूज टी-11 अंतरिक्ष यान से उड़ान भरकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने अपनी अंतरिक्ष यात्रा में 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट स्पेस स्टेशन में बिताए। उनकी इस यात्रा के साथ ही भारत अपने शख्स को अंतरिक्ष में भेजने वाला 14 वां राष्ट्र बन गया था।
3 अप्रैल से 11 अप्रैल 1984 तक राकेश शर्मा अंतरिक्ष में रहे। शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा के बाद भारत में उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया तो वहीं सोवियत यूनियन ने उन्हें 'हीरो ऑफ सोवियत यूनियन' पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके बाद राकेश शर्मा के साथ 'हीरो' शब्द चिपक गया।
योगासन करने वाला एकमात्र अंतरिक्ष यात्री
अंतरिक्ष में उन्होंने विभिन्न प्रकार के 43 प्रयोग किए लेकिन सबसे अनूठा प्रयोग योग को लेकर रहा। वह पहले अंतरिक्ष यात्री थे जिन्होंने योग को अंतरिक्ष में पहुंचाया। अंतरिक्ष के लिए उन्होंने कई आसान की साधना की लेकिन इसमें से अंतरिक्ष में करने के लिए पांच योगासन को अनुमति दी गई। अंतरिक्ष में वजन कम हो जाता है ऐसे में उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन में खुद को बेल्ट से बांध कर इन योगासन को अंजाम दिया। उन्होंने योगाभ्यास करके यह जानने की कोशिश की इससे गुरुत्व के असर को कम करने में मदद मिल सकती है क्या।
अंतरिक्ष में खाया था मैसूर का हलवा
राकेश शर्मा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की मैसूर स्थित डिफेंस फूड रिसर्च लैब की मदद से भारतीय भोजन को अंतरिक्ष में ले गए थे। उन्होंने सूजी का हलवा, आलू छोले और वेज पुलाव था। इसे उन्होंने अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ खाया था। राकेश शर्मा को 50 फाइटर पायलटों में टेस्ट के बाद चुना गया था। शर्मा के अलावा रवीश मल्होत्रा को भी इस टेस्ट में चुना गया था।
1971 में मिग से मारा
स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा का चयन स्पेश मिशन के लिए यूं ही नहीं हुआ था। उन्होंने अपनी बहादुरी और साहस से पहले ही भारत को सराबोर कर दिया था। 1971 की जंग में पाकिस्तान को मिग की मार से ऐसा दहला दिया था कि दुश्मन सिर उठाने की जुर्रत तक नहीं कर पाया। युद्ध में उनके कौशल और साहस को सराहा गया और पूरे देश में उनकी दिलेरी की चर्चा होने लगी थी। उन्होंने 21 बार उड़ान भरी थी। अंतरिक्ष यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने जगुआर और तेजस भी उड़ाए हैं।
चांद वाले अंकल को नहीं मिले भगवान
अंतरिक्ष लौटने के बाद भारत में अक्सर लोग राकेश शर्मा से पूछा करते थे कि क्या वो भगवान से मिले हैं। वह कहते थे—नहीं। मुझे वहां भगवान नहीं मिले। इस यात्रा को अब चार दशक हो गए हैं लेकिन वह अब भी भारत के एकमात्र अंतरिक्ष यात्री हैं। वह बताते हैं कि अब भी कई लोग, महिलाएं, अपने बच्चों से मेरा परिचय यह कह कर कराती है कि ये अंकल चांद पर गए थे। उन्होंने अंतरिक्ष में 35 बार चहल कदमी की थी।
Published on:
03 Apr 2022 12:34 pm
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