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विपक्षी एकजुटता के लिए केजरीवाल का नया दांव, राहुल और खरगे से मांगा समय,समझें पूरा गणित

Arvind Kejriwal Rahul Gandhi : केंद्र द्वारा दिल्ली के लिए जारी किए गए अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप मुखिया अरविंद केजरीवाल देशभर के विपक्षी दलों से मिल रहे हैं, उनसे साथ मांग रहे हैं। अब उन्होंने राहुल और खरगे से मिलने का समय मांगा है। इसके पीछे की गणित क्या है, आइये समझते हैं  

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Arvind Kejriwal Rahul Gandhi : दिल्ली के CM और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने BJP सरकार द्वारा पारित अध्यादेश के खिलाफ संसद में कांग्रेस का समर्थन मांगने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। CM अरविंद केजरीवाल ने आज शुक्रवार को अपने ट्वीट में केंद्र सरकार के अध्यादेश को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार दिया है। दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल ने ये ट्विट केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ विपक्षी पार्टियों से सहयोग हासिल करने के लिए पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, महाराष्ट्र के पूर्वी सीएम और शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार से मुलाकात के बाद किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा की क्या कांग्रेस के नेता इन्हें मिलने के लिए समय देते हैं।


केजरीवाल को मिला अब तक इन दलों का समर्थन

अरविंद केजरीवाल केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ विपक्षी दलों का समर्थन पाने के लिए इस हफ्ते मंगलवार को दिल्ली से बाहर निकले थे। इस मुहिम में अभी तक उन्हें जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का समर्थन मिल चुका है। लेफ्ट दलों से आप को समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है।

अब उन्होंने कांग्रेस से समर्थन हासिल करने के लिए पार्टी के शीर्ष नेता मल्लिाकर्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मिलने का समय मांगा है। समय मिलने पर दिल्ली सीएम कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से संघीय ढांचे और मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर सामान्य हमले पर चर्चा संघीय ढांचे और मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा करेंगे। बता दें कि सीएम अरविंद केजरीवाल केंद्र के अध्यादेश को देश के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी अपमान है।


कांग्रेस के बिना अध्यादेश रोकना असंभव

केजरीवाल को इस बात की पूरी समझ है कि जब तक राज्यसभा में इन्हें कांग्रेस का साथ नहीं मिलेगा, तब तक इस अध्यादेश को रोकना मुमकिन नहीं है। बता दें कि संसद की नई भवन के मामले में अभी जितनी पार्टियां केंद्र सरकार के विरोध में है वो सभी पार्टियां भी अगर अध्यादेश के खिलाफ मत देती है तब भी अध्यादेश वाले बिल को रोकना असंभव है।

ऐसे में केजरीवाल के सामने बस एक ही विकल्प है कि किसी भी प्रकार से कांग्रेस से सांठगांठ कर लिया जाए। लेकिन कांग्रेस को भी इस बात का पूरा भान है कि केजरीवाल अपना काम तो निकाल लेंगे लेकिन जब किसी राज्य में चुनाव लड़ने की बात होगी तो अकेले उतरकर कांग्रेस के वोटों का बंटवारा करके बीजेपी का फायदा करवा देंगे। इसलिए कांग्रेस का रुख इस पर क्या होता है यह देखना दिलचस्प होगा।

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राज्यसभा में मौजूदा स्थिति क्या है ?

बता दें कि, BJP के 93 सांसदों के अलावा BJD के 9, AIADMK के 4 और YSRCP के 9 सांसदों को मिला दें तो राज्यसभा में सरकार के पक्ष में 115 सांसद नजर आते हैं। इसी तरह, अगर AAP के समर्थन में खड़ी पार्टियों की स्थिति देखें तो फिलहाल आप के 10 सांसदों के अलावा केजरीवाल को TMC के 12, RJD के 6, JDU के 5, शिवसेना UTB के 3 और NCP के 4 सांसदों को मिलाकर सिर्फ 40 सांसदों का समर्थन हासिल है।

इनके अलावा DMK के 10, BRS के 9, CPM के 5, समाजवादी पार्टी के 3, CPI के 2, JMM के 2 और RLD के 1 सांसद को मिलाकर कुल 32 सांसद होते हैं। यानी टोटल 72 हुआ, फिर भी बीजेपी से बहुत कम है। इसीलिए केजरीवाल कांग्रेस का साथ पाने को इतना बेताब हैं, वरना केजरीवाल का वो सारा बयान आज भी कांग्रेस के हर नेता को याद होगा जो उन्होंने राहुल गांधी सोनिया गांधी और शिला दीक्षित के लिए दिया था।

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