
लोकसभा चुनाव आते ही बिहार में बाहुबलियों की बहार आ गई है। हाल के दिनों में देखा गया है कि कई दबंग, बाहुबली और जेल में सालों की सजा काट चुके नेता और उनके परिजन अब बिहार में सियासी दलों की पसंद बन रहे हैं। वैसे, बिहार के लिए यह कोई नई बात नहीं है। यहां दबंग और बाहुबलियों की राजनीति में पूछ होती रही है। एक बार फिर उनकी पूछ बढ़ गई है। बाहुबली के रूप में चर्चित पूर्व सांसद की पत्नी लवली आनंद ने अपने बेेटे के साथ हाल ही में राजद को छोड़कर जदयू की सदस्यता ग्रहण की थी।
शिवहर से लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं लवली आनंद
बता दें कि बिहार में आनंद मोहन के नाम कई अपराधिक मामले दर्ज हुए थे। आनंद मोहन हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, लेकिन बिहार सरकार के कानून में परिवर्तन करने के बाद वे जेल से रिहा हो गए। वहीं, अब खबर हैं कि उनकी पत्नी लवली आनंद शिवहर से लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं।
कांग्रेस की जरूरत बन गए हैं पप्पू यादव
बुधवार को दिल्ली में अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय करने वाले पप्पू यादव भी इस चुनाव में कांग्रेस की जरूरत बन गए हैं। पप्पू यादव भले पिछले कई वर्षों से राजनीति में सक्रिय रहे हों, लेकिन उनकी पुरानी छवि बाहुबली की रही है। उनपर हत्या, रंगदारी, अपहरण सहित कई मामले दर्ज हुए थे। यादव के पूर्णिया से चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है।
एक ने तो चुनाव लड़ने के लिए कर ली शादी
वहीं 17 साल जेल की सजा काटकर बाहर आए अशोक यादव के भी लोकसभा चुनाव में चुनावी मैदान में उतरने की बात सामने आई है। उन्होंने दो दिन पहले ही शादी की है। अब चर्चा है कि राजद उनकी पत्नी को मुंगेर से चुनावी मैदान में उतार सकती है। शादी करने के बाद अशोक यादव अपनी पत्नी के साथ लालू प्रसाद के पास आशीर्वाद लेने भी पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि इसके अलावा भी कई बाहुबली या उनका परिवार इस चुनाव में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
बार-बार क्यों चुने जाते हैं बाहुबली?
बिहार की राजनीति में बाहुबलियों के चुनाव लड़ने की परंपरा कोई नई नहीं है। ये लोग अपने बाहुबल के दम पर धन उगाही करते हैं और उसी पैसे का इस्तेमाल चुनाव में करते हैं। इसके अलावा गरीब लोगों को पैसे देकर वोट खरीदते हैं। लोग या तो डर या फिर लालच में इन लोगों को वोट कर देते हैं। इसके बाद बाहुबली अपनी जेब भरने में लग जाते हैं। न तो इनके क्षेत्र में किसी भी तरह का स्कूल बनता है न अस्पताल और न ही किसी भी तरह का विकास हो पाता है। बता दें कि बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का प्रवेश 90 के दशक में तेजी से हुआ।
Updated on:
21 Mar 2024 08:06 pm
Published on:
21 Mar 2024 08:04 pm
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
