
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति को अपने परिवार से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता के समान है। वहीं पति द्वारा अपनी पत्नी से घरेलू काम करने की अपेक्षा करना क्रूरता नहीं कहा जा सकता। विवाहित महिला को घरेलू काम करने के लिए कहना उसे नौकरानी बनाना नहीं, बल्कि इसे परिवार के प्रति उसका प्यार माना जाएगा। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने फैमिली काेर्ट के फैसले के खिलाफ पति की याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर पति को तलाक स्वीकृत करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने फैसला पलटते हुए पति को तलाक मंजूर कर लिया।
वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना बेटे का नैतिक और कानूनी दायित्व
कोर्ट ने कहा कि अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना बेटे का नैतिक और कानूनी दायित्व है और शादी के बाद पत्नी की मांग पर उनसे अलग रहना हमारी संस्कृति नहीं है। मौजूदा मामले में पति ने अपने वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए पत्नी के साथ अलग आवास की व्यवस्था की इसके बावजूद पत्नी ने अपने माता-पिता के साथ रहने लगी। वैवाहिक बंधन को पोषित करने के लिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि पति-पत्नी एक साथ रहें। अस्थायी अलगाव से पति-पत्नी के मन में असुरक्षा की भावना पैदा होती है कि दूसरा वैवाहिक बंधन को जारी रखने के लिए तैयार नहीं है।
मध्य प्रदेश सरकार व हाई कोर्ट रजिस्ट्रार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा में दृष्टिबाधितों को नियुक्ति के लिए पात्र नहीं मानने संबंधी नियमों के खिलाफ स्वत: प्रसंज्ञान लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, राज्य सरकार और केंद्र को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने पत्र याचिका को स्वत: प्रसंज्ञान में बदल कर वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल को एमिकस क्यूरी और रवि रघुनाथ को एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड नियुक्त किया।
Published on:
08 Mar 2024 08:50 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
