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असम चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, कांग्रेस में शामिल हुई नंदिता गरलोसा

Assam Election 2026: असम की मंत्री नंदिता गरलोसा ने BJP छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है और अब हाफलोंग सीट से चुनाव लड़ेंगी।

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मंत्री नंदिता गरलोसा कांग्रेस में शामिल (X-ANI)

असम की राजनीति में चुनाव से पहले बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। नंदिता गरलोसा ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया है। टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर उठाए गए इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है।

कांग्रेस में शामिल हुईं नंदिता गरलोसा

कांग्रेस ने आधिकारिक बयान जारी कर गरलोसा के पार्टी में शामिल होने की पुष्टि की। पार्टी ने कहा कि नंदिता गरलोसा पिछले पांच सालों से दिमा हसाओ जिले की जनता की सशक्त आवाज रही हैं और अपने सिद्धांतों पर हमेशा मजबूती से खड़ी रही हैं।

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि असम की मौजूदा सरकार, जिसकी अगुवाई हिमंत बिस्वा सरमा कर रहे हैं, आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी कर रही है और बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने में अधिक रुचि रखती है।

हाफलोंग सीट से चुनाव लड़ेंगी

नंदिता गरलोसा फिलहाल हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अब कांग्रेस के टिकट पर यहीं से चुनाव लड़ेंगी। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने पहले इस सीट से अपने राज्य महासचिव निर्मल लंगथासा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने पार्टी हित में गरलोसा के पक्ष में अपनी दावेदारी वापस ले ली। इस सीट पर भाजपा ने इस बार रुपाली लांगथासा को उम्मीदवार बनाया है। इससे हाफलोंग सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

नंदिता की सीएम सरमा से मुलाकात

बताया जा रहा है कि हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाफलोंग स्थित गरलोसा के आवास पर उनसे मुलाकात की थी। हालांकि इस बैठक के परिणामों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी, जिसके बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं।

कब होंगे चुनाव?

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार चुनाव में दल-बदल, स्थानीय मुद्दों और आदिवासी क्षेत्रों के विकास जैसे विषय अहम भूमिका निभा सकते हैं। खासकर हाफलोंग जैसी सीटों पर कड़े मुकाबले की संभावना है, जहां उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है।