
जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार क्लाइमेट और इकोलॉजी के बीच संतुलन साधने वाला आदेश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने कोयले और गैस से चलने वाले बिजली उत्पादन के बदलाव और लगभग खत्म हो चुके ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) पक्षी की रक्षा के बीच संतुलन बनाया है। यह पक्षी मुख्य रूप से राजस्थान में पाया जाता है। जजों ने अप्रेल 2019 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था। वह आदेश राजस्थान और गुजरात में 90,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों पर रोक लगाता था। यह रोक सौर ऊर्जा उत्पादन को काफी कम कर देता था और 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 450 गीगावॉट तक बढ़ाने के लक्ष्य को खतरे में डाल सकता था।
नए फैसले में ऐसे बनाया संतुलन
अब, सुप्रीम कोर्ट ने गोडावण के 13,000 वर्ग किलोमीटर के मुख्य आवास को छोड़कर, 77000 वर्ग किलोमीटर में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों पर लगी रोक हटा दी है। इस केस का फैसला रविवार को अपलोड किया गया। इसके अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और पक्षियों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित था। बिजली के तारों से टकराने से ज्यादातर गोडावण पक्षी मर जाते हैं, इसलिए पर्यावरणविद एम. के. रंजीतसिंह की दलीलों के आधार पर हाई वोल्टेज तारों पर रोक लगाई गई थी।
मामले की जांच के लिए समिति बनी
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मुद्दे की पूरी जांच के लिए सात सदस्यों की एक नई विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति 31 जुलाई तक सरकार के माध्यम से अदालत को रिपोर्ट सौंपेगी। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों को स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि खासकर गुजरात और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता, उसके व्यापक सतत विकास लक्ष्यों के साथ जुड़ती है।'
Updated on:
09 Apr 2024 08:57 am
Published on:
09 Apr 2024 08:54 am
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