23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बालासोर ट्रेन हादसा : मुर्दाघरों में अब भी लाशों के ढेर, पहचानना हो रहा मुश्किल, अब तक 151 की हुई पहचान

Balasore Accident: बालासोर ट्रेन हादसे के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लाशों की पहचान हो गई है। इस हादसे में 275 लोगों की मौत हुई थी। हादसे के 45 घंटे बाद अभी तक 151 लाशों की पहचान हो सकी है।  

2 min read
Google source verification
बालासोर ट्रेन हादसा : मुर्दाघरों में अब भी लाशों की ढेर, पहचानना हो रहा मुश्किल

बालासोर ट्रेन हादसा : मुर्दाघरों में अब भी लाशों की ढेर, पहचानना हो रहा मुश्किल

Balasore Accident: दो जून को ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे के बाद अब लाशों की शिनाख्त करना बड़ी चुनौती हो गई है। एक ओर हादसे के बाद से लापता हुए लोगों की तलाश में उनके परिजन भटक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर प्रशासन मुर्दाघरों में पड़े लाशों को बचाए रखने के लिए मशक्कत कर रही है। भीषण गर्मी के कारण लाशें तेजी से क्षत-विक्षत हो रही हैं। ऐसे में लोगों को पहचान करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ओडिशा के प्रधान सचिव प्रदीप जेना ने बताया कि 275 शवों में से अब तक 151 की पहचान कर ली गई है। ओडिशा सरकार ने शवों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए शवों/मृत शरीर वाहकों की व्यवस्था की है।




अस्पताल और मुर्दाघरों में हेल्प डेस्क स्थापित

ओडिशा के विकास आयुक्त अनु गर्ग ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रत्येक अस्पताल और प्रत्येक मुर्दाघर में हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं और अधिकारी पीड़ितों और उनके परिवार के सदस्यों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रहे हैं। लेकिन हादसे में कई शव इस तरह के कट-छट गए कि उनका पहचान कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है।

लाशों की पहचान के लिए दो दिन का समय

ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव प्रदीप जेना ने कहा कि भीषण गर्मी के कारण शव तेजी से क्षत-विक्षत हो रहे हैं। अत: कानून के अनुसार राज्य अंतिम संस्कार के लिए अधिकतम दो और दिन का इंतजार कर सकता है। जेना ने कहा कि शवों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, ‘डीएनए नमूना लिया जाएगा और मृतक की तस्वीरें सरकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी।

बचाव अभियान हो चुका पूरा

बालासोर ट्रिपल ट्रेन त्रासदी में बचाव अभियान पूरा हो चुका है। घायल यात्रियों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और कई को छुट्टी भी दे दी गई है। लेकिन ओडिशा सरकार के सामने बड़ी चुनौती शवों की पहचान की है। जहां कुछ शव लावारिस पड़े हैं, वहीं दो अलग-अलग परिवारों ने एक ही शव पर दावा किया है।


कई शव बहुत बुरी स्थिति में

बताया गया कि एम्स भुवनेश्वर के मुर्दाघर में 123 शवों को संरक्षित किया गया है, जबकि अन्य 70 को राजधानी अस्पताल, सम अस्पताल, अमरी अस्पताल, केआईएमएस अस्पताल और भुवनेश्वर के हाई-टेक अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है। भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) आयुक्त विजय अमृता कुलंगे ने कहा, हम कुछ शवों की पहचान करने में समस्याओं का सामना कर रहे हैं क्योंकि शव बहुत खराब स्थिति में हैं और चेहरों की ठीक से पहचान नहीं हो पा रही है।

एक ही लाश पर दो परिवार ने किया दावा

पश्चिम बंगाल के एक वृद्ध व्यक्ति ने कहा, हमने हमारे (परिजन के) शव पर दावा करने के लिए स्थानीय प्राधिकरण के समक्ष संबंधित दस्तावेज जमा किए हैं। लेकिन किसी और ने उसी शव पर दावा करते हुए शिकायत दर्ज कराई है। इसलिए, हमें शव नहीं मिल सका है।

लोगों की शवों की तस्वीर दिखाकर कराया जा रहा पहचान

प्रशासन लोगों को शवों की तस्वीरें दिखा रहे हैं और विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे यात्रियों की सूची भी दिखा रहे हैं। अगर किसी को पता चलता है कि उसका प्रियजन अस्पताल में इलाज करा रहा है, तो हम उसे संबंधित अस्पताल ले जाते हैं। यदि वे किसी की पहचान करते हैं, तो हम उन्हें सभी सहायता प्रदान करते हैं।

यह भी पढ़ें - ओडिशा ट्रेन हादसा: ट्रायल रन खत्म, दोनों ट्रैक पर यात्री ट्रेनों की आवाजाही शुरू