
Bangladesh Violence: असम के समझौते के कार्यान्वयन मंत्री अतुल बोरा ने मंगलवार को बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त की और सीमा मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बोरा, जो असम गण परिषद (AGP) के अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने बांग्लादेश की मुक्ति के दौरान भारत द्वारा किए गए बलिदानों पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा, "हमारे देश ने बांग्लादेश की आजादी के लिए जो किया, उसे नहीं भूलना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ घटनाएं हो रही हैं। हमारे वरिष्ठ अधिकारी ने बांग्लादेश का दौरा किया है और मुझे उम्मीद है कि इस मुद्दे को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।"
बोरा ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, बांग्लादेशी घुसपैठ के विरोध में असम आंदोलन की उत्पत्ति को ध्यान में रखते हुए। उन्होंने कहा, "हमें घुसपैठ रोकनी चाहिए। सीमा पर बाड़ लगाने का काम जारी है।" छह साल लंबे असम आंदोलन के बाद 1985 में हस्ताक्षरित असम समझौते पर विचार करते हुए, बोरा ने इसके प्रावधानों को लागू करने में विफल रहने के लिए पिछली सरकारों की आलोचना की।
"नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बिप्लब शर्मा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की। राज्य सरकार ने समिति की अधिकांश सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है।" बोरा ने आश्वासन दिया कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही इन सिफारिशों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी लाभ के लिए सीमा सुरक्षा को कमजोर करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया, "मोदी सरकार के तहत सीमा पूरी तरह सुरक्षित है। इससे पहले कांग्रेस ने अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए सीमा खोली थी।"
Updated on:
11 Dec 2024, 10:11 AM IST
Published on:
11 Dec 2024, 10:11 AM IST
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