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‘मुसलमानों के खिलाफ बोलने वाले का सरकार करेगी सम्मान’ तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी पर TMC का वार

तसलीमा नसरीन की 20 साल बाद कोलकाता वापसी से पहले TMC विधायक अखरुज्जमान ने NDA पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कोई मुसलमानों के खिलाफ बोलेगा तो डबल इंजन सरकार उसका सम्मान करेगी ही।
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TMC MLA Akhruzzaman

TMC विधायक अखरुज़्ज़मान (फोटो- आईएएनएस)

करीब दो दशक बाद बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। उनके प्रस्तावित दौरे को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक अखरुज्जमान ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग मुसलमानों के खिलाफ बोलते हैं, डबल इंजन सरकार उन्हें सम्मान देती है। अखरुज्जमान ने मीडिया बातचीत के दौरान कहा कि देखिए, तसलीमा नसरीन बांग्लादेश की एक लेखिका हैं। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ, इस्लाम की शरियत के खिलाफ बहुत कुछ कहा है। अगर कोई मुसलमानों के खिलाफ बोलेगा तो डबल इंजन सरकार उसका सम्मान करेगी ही, इसमें कहने की क्या बात है।

20 साल बाद कोलकाता लौट रही नसरीन

अखरुज्जमान का यह बयान ऐसे समय आया है जब तसलीमा नसरीन की लगभग 20 साल बाद कोलकाता वापसी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा इस दौरे को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में पेश कर रही है, जबकि TMC इसे लेकर केंद्र और भाजपा पर राजनीतिक हमला बोल रही है।

धार्मिक कट्टरता विरोधी कार्यक्रम में लेंगी हिस्सा

बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि वह 1 अगस्त को कोलकाता पहुंचेंगी। वह रवींद्र सदन में आयोजित धार्मिक कट्टरता विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी और कविता पाठ भी करेंगी। इस कार्यक्रम का आयोजन कई धर्मनिरपेक्ष और कट्टरता विरोधी संगठनों की ओर से किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम तसलीमा नसरीन की करीब 20 साल बाद कोलकाता वापसी का स्वागत करने के लिए रखा गया है। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के शामिल होने की भी बात कही गई है।

2007 में छोड़ना पड़ा था कोलकाता

तसलीमा नसरीन को वर्ष 2007 में उनकी आत्मकथात्मक पुस्तक के कुछ हिस्सों को लेकर हुए विवाद और हिंसक प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था। उस समय वाम मोर्चा सरकार ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें शहर से बाहर भेज दिया था। इसके बाद वह जयपुर और फिर दिल्ली चली गईं, जहां उन्हें केंद्र सरकार की ओर से लंबे समय का रेजिडेंट परमिट और मल्टीपल एंट्री वीजा मिला।

नसरीन की वापसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सम्मान का प्रतीक

भाजपा का कहना है कि पिछली वाम और TMC सरकारों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने के बजाय राजनीतिक दबाव के आगे झुकने का काम किया, जबकि आयोजकों का दावा है कि इस बार उनकी वापसी धार्मिक कट्टरता के खिलाफ उनके लंबे संघर्ष और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सम्मान का प्रतीक होगी।