
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट की पुलिस ने फर्जी वीजा बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज मिले। पुलिस के मुताबिक पांच साल में गिरोह पांच हजार से ज्यादा जाली वीजा बनाकर करीब 300 करोड़ रुपए कमा चुका है। हर फर्जी वीजा आठ लाख से 10 लाख रुपए में बेचा जाता था। दिल्ली पुलिस ने दो सितंबर को हरियाणा के संदीप को एयरपोर्ट से पकड़ा था। वह फर्जी वीजा पर रोम जा रहा था।
उससे पूछताछ में फर्जी वीजा देने वाले एजेंट की जानकारी मिली। उसने यह भी बताया कि उसके गांव के कई लोग फर्जी वीजा पर विदेश जा चुके हैं। जांच-पड़ताल में पता चला कि फर्जी वीजा दिल्ली के तिलकनगर में तैयार किए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने वहां छापा मारकर 16 नेपाली पासपोर्ट, दो भारतीय पासपोर्ट, लैपटॉप, स्कैनर, कलर प्रिंटर, कंप्यूटर और 30 फर्जी वीजा स्टीकर बरामद किए। गिरफ्तार लोगों के नाम मनोज मोंगा, आसिफ अली, शिव गौतम, नवीन राणा, बलबीर सिंह और जसविंदर सिंह है।
पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना मनोज मोंगा ग्राफिक डिजाइनिंग में डिप्लोमाधारी है। करीब पांच साल पहले उसकी मुलाकात जयदीप सिंह से हुई, जिसने उसे ग्राफिक डिजाइनिंग के हुनर का इस्तेमाल नकली वीजा बनाने में करने के लिए उकसाया। उसने मनोज को जरूरी उपकरण भी मुहैया कराए। यह गिरोह संचार के लिए टेलीग्राम और वॉट्सएंप का इस्तेमाल करता था। कई क्षेत्रों में स्थानीय एजेंटों का नेटवर्क था, जो विदेश में नौकरी चाहने वाले लोगों को जाल में फंसाते थे।
Published on:
17 Sept 2024 07:49 am
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