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Bihar Elections 2025 : ये 45 विधानसभा सीटें बढ़ा सकती हैं बीजेपी की ताकत, पीएम मोदी का है खास फोकस

पीएम की मधुबनी और बिक्रमगंज की सभा को एक ऑपरेशन के आगाज और अंत के रूप में देखा जाना चाहिए। उत्तर बिहार में एनडीए मजबूत है। लेकिन मगध-शाहाबाद क्षेत्र चुनौती वाले हैं।

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पटना

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Ashish Deep

May 31, 2025

PM Modi का इस साल में तीन बार बिहार का दौरा कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार यात्रा के नाम पर इतिहास रच दिया है। मई की उनकी बिहार यात्रा का नंबर 50वां है। ऐसा करने वाले वह पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। 2025 में ही देखा जाए तो पीएम अब तक 3 बार बिहार आ चुके है। राजनीतिक पंडित साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को इसकी बड़ी वजह मानते हैं। साथ ही मगध-शाहाबाद बेल्ट में एनडीए की कमजोर स्थिति भी चिंता की वजह है, जहां विधानसभा की 55 सीटें हैं।

फरवरी में भागलपुर गए

प्रधानमंत्री फरवरी में भागलपुर गए थे। इसके बाद अप्रैल में मधुबनी आए। मधुबनी की सभा से ही पीएम ने पाकिस्तान को पहलगाम आंतकी हमले के लिए चेताया था। उन्होंने ऐलान किया था कि इसका बदला लिया जाएगा और वह अचूक होगा। फिर 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया।

मैंने अपना वादा पूरा किया

इसके बाद मई में उन्होंने राजद नीत महागठबंधन के गढ़ मगध और शाहाबाद का हार्ट कहे जाने वाले बिक्रमगंज में सभा की। उन्होंने कहा-मैंने अपना वादा पूरा किया। पाकिस्तान को पहलगाम हमले का माकूल जवाब दिया गया है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई न खत्म हुई है और न ही रुकेगी।

बिहार की सभाएं ऑपरेशन का आगाज व अंत

राजनीतिक विश्लेषक ओम प्रकाश अश्क के मुताबिक पीएम की मधुबनी और बिक्रमगंज की सभा को एक ऑपरेशन के आगाज और अंत के रूप में देखा जाना चाहिए। उत्तर बिहार में एनडीए मजबूत है और मधुबनी इसी तरफ पड़ता है। लेकिन एनडीए को मगध-शाहाबाद क्षेत्र में 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में मुंह की खानी पड़ी थी। कांग्रेस-राजद-माले के गठजोड़ को दोनों चुनावों में यहां बड़ी सफलता मिली थी।

दिल्ली में जीत के बाद निगाह बिहार पर

अश्क के मुताबिक दिल्ली में शानदार जीत के बाद बीजेपी की निगाह बिहार पर है। पार्टी नीत गठबंधन ने इस बार 243 विधानसभा सीटों में से 225 को जीतने का टार्गेट रखा है। इसके लिए बीजेपी मगध-शाहाबाद बेल्ट में ज्यादा मेहनत कर रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए बिहार में 10 सीट हार गया था। इनमें 7 सीट इसी बेल्ट की थी। बिक्रमगंज काराकट विधानसभा सीट के अंतर्गत आता है, जो 2020 में बीजेपी, माले से हार गई थी। माले के अरुण सिंह को 82700 वोट मिले थे जबकि बीजेपी के राजेश्वर राज को 64511 वोट।

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नक्सल प्रभावत जिले

अश्क के मुताबिक शाहाबाद में 4 लोकसभा सीट-आरा, सासाराम, काराकट, बक्सर और मगध में पटना, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, नवादा सीट है। दशकों से शाहाबाद जमीनदारों और लेबरों के बीच खूनी संघर्ष के लिए बदनाम रहा है। कई जिले नक्सल प्रभावित रहे हैं।

मगध-शाहाबाद क्षेत्र में 55 सीट

विधानसभा सीटों के मामले में मगध-शाहाबाद क्षेत्र में 55 कॉन्स्टिटयूएंसी हैं। इनमें सिर्फ 10 सीट एनडीए के पास है, जिनमें बीजेपी ने 5 सीट ही जीती हैं। यानी 45 सीट पर विरोधी काबिज हैं। इन 45 सीटों पर ही इस बार चुनाव में बढ़त बनानी है। पहले के चुनाव में एनडीए को इस क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर का सामना भी करना पड़ा है।

दो वजहों से बिहार चुनाव स्पेशल

अश्क के मुताबिक बिहार चुनाव इस बार दो वजहों से और भी खास है। पहला, 2025 के केंद्रीय बजट में बिहार को विशेष प्राथमिकता मिली है, एयरपोर्ट-रेल-रोड जैसी कई विकास योजनाओं की शुरुआत की गई है। दूसरा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद बिहार का चुनाव देश में पहला इलेक्शन होगा। अब यह देखना होगा जनताजनार्दन इस बार सत्ता की चाभी किसके हाथ में थमाती है।