दरअसल, यह बयान तमिलनाडु की राजनीति और AIADMK-बीजेपी गठबंधन को लेकर दिए गए एक भाषण के दौरान सामने आया था। उसी बातचीत में यह विवादित टिप्पणी चर्चा में आ गई, जिसे लेकर अब सियासत गरमा गई है। विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा था। खरगे के मुताबिक, उनका आशय यह था कि सरकार एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों पर दबाव बना रही है। उन्होंने ED, आयकर विभाग और CBI जैसी संस्थाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने के लिए किया जा रहा है।