
संसद पहुंचे मेधा पाटकर व प्रकाश राज । फोटो: X Handle Sourav Roy Barman
Parliament Panel Protest BJP: संसद की स्थायी समिति की एक अहम बैठक उस वक्त रद्द (Committee meeting cancelled) करनी पड़ी, जब बीजेपी सांसदों ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और अभिनेता से एक्टिविस्ट बने प्रकाश राज (Prakash Raj parliament panel) की मौजूदगी पर आपत्ति (BJP protest Parliament) जताई। इस विरोध के चलते समिति की बैठक का कोरम पूरा नहीं हो सका और उसे स्थगित करना पड़ा। बैठक का विषय था – “भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013” के लागू होने का असर और इसकी पारदर्शिता। लेकिन बैठक जैसे ही शुरू हुई, बीजेपी ( BJP) सांसद बैठक स्थल में दाखिल होने से पहले ही गुस्से में (Parliament Panel Protest BJP) बाहर निकल आए। कोरम पूरा न होने के कारण बैठक को रद्द करना पड़ा।
बीजेपी सांसदों का कहना है कि समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका ने उन्हें यह नहीं बताया कि किन लोगों को गवाह के तौर पर बुलाया जा रहा है। सांसदों ने मेधा पाटकर और प्रकाश राज को "राष्ट्र-विरोधी" और "शहरी नक्सली" कह कर बैठक से बहिर्गमन किया।
बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने कहा, “हमें नहीं बताया गया था कि कौन लोग बुलाए जा रहे हैं। अंदर जाकर देखा कि मेधा पाटकर बैठी हैं। ऐसे लोगों की जानकारी पहले से दी जानी चाहिए थी।”
समिति के चेयरमैन उलाका ने कहा कि सभी नाम लोकसभा स्पीकर कार्यालय से मंजूर हुए थे और इस तरह की प्रक्रिया आम बात है। उन्होंने कहा: “सुनिए तो सही, मेधा पाटकर ज़मीन और पुनर्वास के लिए वर्षों से लड़ती रही हैं। आपकी असहमति हो सकती है, पर लोकतंत्र में सबकी बात सुनना जरूरी है।”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बीजेपी सांसदों के रवैये को "अराजकता" बताया और कहा: “जब कोई गवाह बुलाया गया है, तो उसकी बात तो सुनिए। आप लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ठेंगा दिखा रहे हैं।”
संसदीय समिति में कुल 29 सदस्य हैं। मंगलवार को 14 सदस्य ही पहुंचे थे, लेकिन बीजेपी और उसके सहयोगियों के 8 सांसदों ने बहिष्कार कर दिया, जिससे कोरम पूरा नहीं हो पाया और बैठक रद्द कर दी गई।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा को लेकर भी भ्रम की स्थिति रही। बीजेपी का कहना था कि वे भी विरोध में थे, लेकिन कांग्रेस का दावा है कि उन्होंने बहिष्कार नहीं किया।
मेधा पाटकर लंबे समय से नर्मदा बचाओ आंदोलन का चेहरा रही हैं और सरदार सरोवर बांध का विरोध करने को लेकर गुजरात और बीजेपी नेताओं के निशाने पर रही हैं। प्रकाश राज अपनी खुले तौर पर भाजपा विरोधी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं।
🗨️ “अगर मेधा पाटकर और प्रकाश राज को बुला सकते हैं, तो अगली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी बुला लीजिए।”
🗨️ “शहरी नक्सलियों को संसदीय समितियों में क्यों बुलाया जा रहा है?”
🗨️ “बैठक के गवाहों की सूची छुपाई गई। ये पूरी प्रक्रिया अपारदर्शी थी।”
"ऐसे लोगों की बात सुनने में क्या बुराई है?"
"संसदीय समिति की रिपोर्टें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं, वे सिर्फ सिफारिशें होती हैं।"
"अगर आप सहमत नहीं भी हैं, तो भी लोकतंत्र में सबकी बात सुननी चाहिए।"
🗨️ "देशद्रोहियों को संसद बुलाओगे तो यही होगा!"
🗨️ "भाजपा को डर है कि कहीं असलियत सामने न आ जाए…"
🗨️ "क्या संसद अब विचारों को दबाने की जगह बन गई है?"
🗨️ "ये संसदीय बहस है या राजनीतिक अखाड़ा?"
बहरहाल यह घटनाक्रम बताता है कि कि संसदीय समितियों में अब मुद्दों से ज्यादा राजनीतिक विचारधाराओं का टकराव हावी होता जा रहा है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि भाजपा गरीबों और हाशिये पर खड़े समुदायों की समस्याएं सुनने से कतराती है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रविरोधियों को मंच देने का मुद्दा बता रही है।
Published on:
01 Jul 2025 10:12 pm
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