
BJP trying to woo tribal vote bank in Tripura, know their importance and impact on assembly election
त्रिपुरा में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पूर्व यहाँ तमाम राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। इसके साथ ही विभिन्न वोट बैंक को भी लुभान में जुटे हैं। इसी क्रम में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा त्रिपुरा के दो दिवसीय दौरे पर हैं। अपने दौरे के दूसरे दिन उन्होंने अगरतला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और मोदी सरकार द्वारा आदिवासी समुदायों के लिए किये जा रहे कार्यों को गिनाया। स्पष्ट है कि बीजेपी अपने दम पर आदिवासी वोट में पैठ बनाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। इस रिपोर्ट में जानेंगे कि आखिर त्रिपुरा में आदिवासी वोट बैंक कितना महत्वपूर्ण है और कैसे ये विधानसभा चुनावों पर प्रभाव डाल सकता है।
आज एक सभा को त्रिपुरा में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "पीएम मोदी ने आदिवासी आबादी के प्रतिनिधित्व की दिशा में काम किया है। उनके मंत्रिमंडल में सात मंत्री आदिवासी हैं, त्रिपुरा के कम से कम 5 मंत्री आदिवासी हैं। अब हमारे पास देश के सर्वोच्च पद पर एक आदिवासी प्रतिनिधि है। द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना आदिवासियों का सम्मान है।"
इस दौरान नड्डा ने कहा कि देश पर जब भी कोई संकट आया है तो रक्षा करने के लिए जनजातीय समाज का हमेशा आगे रहा है। ये समाज आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने अपने सम्बोधन में आदिवासी समुदाय को लेकर ये बातें यूं ही नहीं कहीं। इसके जरिए वो राज्य के 31.8 फीसदी आबादी को साधने का प्रयास कर रहे हैं।
बता दें कि त्रिपुरा की कुल 60 में से 20 सीटों पर आदिवासी समुदाय का प्रभाव है और ये सबसे सुरक्षित मानी जाती हैं। यहाँ आदिवासियों की आबादी अन्य समुदाय और जातियों की तुलना में अधिक है। इन सीटों पर बीजेपी ने आईपीएफटी केसाथ मिलकर जीत दर्ज की थी। अब आदिवासी संगठन आईपीएफटी के साथ उसके संबंध खराब हो गए जिसके बाद से बीजेपी अपने दम पर आदिवासी वोट में पैठ बनाने में जुटी है। बीजेपी इन सीटों पर अपना दावा ठोकती है। ऐसे में बीजेपी के लिए 20 सीटों पर अपनी पकड़ को मजबूत करने में जुटी है।
Updated on:
29 Aug 2022 09:29 pm
Published on:
29 Aug 2022 09:08 pm
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