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Budget 2026: MSME सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ के बजट की घोषणा, छोटे उद्योगों को चैपिंयन बनाने का संकल्प

Budget 2026 में MSME सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने 10000 करोड़ रुपये का नया MSME ग्रोथ फंड बनाने की घोषणा की है।

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भारत

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Himadri Joshi

Feb 01, 2026

Finance Minister Nirmala Sitharaman

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फोटो- एएनआई)

भारत का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र लंबे समय से अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह सेक्टर रोजगार सृजन, निर्यात और औद्योगिक उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। Union Budget 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने MSME सेक्टर को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं, जिनका उद्देश्य क्रेडिट पहुंच आसान बनाना, टेक्नोलॉजी अपग्रेड करना और पारंपरिक उद्योग क्लस्टरों को फिर से सक्रिय करना है।

MSME के लिए Budget 2026 की प्रमुख घोषणाएं

बजट 2026 में सरकार ने 10000 करोड़ रुपये का नया MSME ग्रोथ फंड बनाने की घोषणा की है, जो उच्च विकास क्षमता वाले छोटे और मध्यम उद्यमों को इक्विटी और दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही Self-Reliant India Fund में 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ी गई है। यह फंड पहले से 50000 करोड़ रुपये का है और इसका लक्ष्य माइक्रो एंटरप्राइज को वित्तीय संकट से उबारना है। Government e-Marketplace को ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) से जोड़ने की योजना से भुगतान में देरी की समस्या कम होने की उम्मीद है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में MSME की भूमिका

MSME सेक्टर भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 29 से 31 प्रतिशत का योगदान देता है। मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में इसकी हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत और निर्यात में 44 से 48 प्रतिशत तक है। देश में लगभग 7.47 करोड़ MSME इकाइयां हैं, जो 32 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं। यह क्षेत्र कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। नवाचार, उद्यमिता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में MSME की भूमिका को देखते हुए नीति समर्थन बेहद जरूरी हो जाता है।

MSME ग्रोथ में आने वाली बाधाएं

महत्वपूर्ण होने के बावजूद MSME सेक्टर कई चुनौतियों से जूझ रहा है। बैंकों से समय पर क्रेडिट न मिलना, पुरानी टेक्नोलॉजी, भुगतान में देरी और जटिल नियम छोटे कारोबारियों की प्रगति रोकते हैं। उच्च अनुपालन लागत और क्षेत्रीय असंतुलन भी समस्या को बढ़ाते हैं। इन कारणों से कई उद्यम अनौपचारिक क्षेत्र में ही काम करते रहते हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता और निर्यात संभावनाएं सीमित हो जाती हैं।

टियर 2 और टियर 3 शहरों पर सरकार का फोकस

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार टियर 2 और टियर 3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश जारी रखेगी। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार MSME भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। नए उद्योग क्लस्टर, बेहतर लॉजिस्टिक्स और डिजिटल कनेक्टिविटी से इन शहरों में MSME को विस्तार का मौका मिलेगा।