
CAG Report 2026 (AI Image)
States Capex Budget CAG Report, CAG Report 2026: देश में बुनियादी ढांचा विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए पूंजीगत खर्च को सबसे अहम माना जाता है, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के ताजा आंकड़ों ने कई राज्यों की धीमी विकास रफ्तार को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के 20 प्रमुख राज्यों ने पूंजीगत व्यय के लिए तय बजट का औसतन सिर्फ 77 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च किया है।
सीएजी के प्रोविजनल आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इन राज्यों ने कुल 10.26 लाख करोड़ रुपए पूंजीगत खर्च के लिए निर्धारित किए थे, लेकिन मार्च 2026 तक केवल 7.92 लाख करोड़ रुपए ही खर्च हो सके। रिपोर्ट में सबसे खास बात यह रही कि कांग्रेस शासित कर्नाटक और तेलंगाना विकास खर्च के मामले में सबसे आगे रहे, जबकि भाजपा शासित राजस्थान और छत्तीसगढ़ सबसे पीछे नजर आए।
पूंजीगत खर्च के मामले में तेलंगाना ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। राज्य सरकार ने 36,504 करोड़ रुपए का पूंजीगत बजट तय किया था, लेकिन वास्तविक खर्च 53,873 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इस तरह राज्य ने 147.58 प्रतिशत बजट उपयोग दर्ज किया।
कर्नाटक भी सूची में दूसरे स्थान पर रहा। राज्य ने 68,172 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले 69,852 करोड़ रुपए खर्च कर 102.46 प्रतिशत उपयोग दर्ज किया। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और बिहार भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान ने पूंजीगत खर्च के मामले में बेहद कमजोर प्रदर्शन किया। राज्य ने 56,327 करोड़ रुपए के बजट के मुकाबले केवल 29,190 करोड़ रुपए खर्च किए, जो कुल बजट का 51.82 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ ने भी केवल 57.12 प्रतिशत पूंजीगत बजट खर्च किया। पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे खराब रही, जहां तय बजट का सिर्फ 48.06 प्रतिशत ही उपयोग हो पाया।
मध्यप्रदेश ने 86.53 प्रतिशत पूंजीगत खर्च के साथ छठा स्थान हासिल किया, जबकि पंजाब ने 85.54 प्रतिशत और गुजरात ने 82.28 प्रतिशत बजट उपयोग दर्ज किया।
सीएजी रिपोर्ट में एक और अहम तथ्य सामने आया है। राज्यों ने पूरे वित्त वर्ष के पूंजीगत खर्च का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले मार्च महीने में खर्च किया। विशेषज्ञ इसे वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले बजट पूरा करने की जल्दबाजी बता रहे हैं।
पूर्व में सीएजी और संसदीय समितियां भी यह सुझाव दे चुकी हैं कि पूंजीगत खर्च पूरे साल संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता प्रभावित न हो।
जहां कई राज्य विकास खर्च में पीछे रहे, वहीं केंद्र सरकार ने पूंजीगत खर्च के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया। केंद्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी ढांचा विकास के लिए 11.21 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत बजट तय किया था।
संशोधित अनुमानों के अनुसार, केंद्र सरकार फरवरी 2026 तक यानी 11 महीनों में ही इस बजट का 84 प्रतिशत खर्च कर चुकी थी। सरकार का मानना है कि पूंजीगत खर्च बढ़ाने से मांग, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है।
राजस्थान के आंकड़ों ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार विकास परियोजनाओं पर खर्च करने में पीछे रही, लेकिन कर्ज लेने में आगे निकल गई।
राज्य सरकार ने बजट में 42,972 करोड़ रुपए उधार और देनदारी का लक्ष्य रखा था, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक यह आंकड़ा बढ़कर 71,261 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यानी सरकार ने तय सीमा से करीब 65 प्रतिशत अधिक कर्ज लिया।
पूंजीगत खर्च वह सरकारी व्यय होता है, जिससे स्थायी संपत्तियों और बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाता है। इसमें सड़क, पुल, रेलवे, अस्पताल, स्कूल, बिजली परियोजनाएं और मशीनरी जैसी परियोजनाएं शामिल होती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, पूंजीगत खर्च बढ़ने से सीमेंट, स्टील और निर्माण सामग्री की मांग बढ़ती है, उद्योगों को गति मिलती है और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होते हैं। वहीं यदि पूंजीगत खर्च कम होता है तो इसका असर विकास परियोजनाओं, रोजगार और भविष्य की आर्थिक वृद्धि पर पड़ता है।
Published on:
19 May 2026 04:05 am
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