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CAA नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव, पाकिस्तान-बांग्लादेश से आए आवेदकों को अब करना होगा ये काम

Citizenship Rules 2026: गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए नागरिकता आवेदकों को पासपोर्ट की पूरी जानकारी देनी होगी और मंजूरी के 15 दिनों के भीतर उसे जमा करना होगा।

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भारत

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Rahul Yadav

May 19, 2026

Govt Mandates Passport Disclosure for Indian Citizenship

Govt Mandates Passport Disclosure for Indian Citizenship (AI Image)

Govt Mandates Passport Disclosure for Indian Citizenship: केंद्र सरकार ने नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए लोगों के लिए नई शर्त लागू कर दी है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार, भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों को अब अपने मूल देश के पासपोर्ट की पूरी जानकारी देनी होगी।

गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियम, 2009 में संशोधन करते हुए यह व्यवस्था लागू की है। नए नियम के तहत आवेदनकर्ता को यह घोषित करना होगा कि उसके पास पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान सरकार द्वारा जारी कोई वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट है या नहीं।

पासपोर्ट की पूरी जानकारी देनी होगी

नोटिफिकेशन के अनुसार, यदि किसी आवेदक के पास सक्रिय पासपोर्ट है तो उसे पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तारीख, स्थान और एक्सपायरी डेट जैसी सभी जानकारियां देनी होंगी।

इसके साथ ही आवेदकों को यह घोषणा भी करनी होगी कि नागरिकता आवेदन मंजूर होने के 15 दिनों के भीतर वे अपना वैध या समाप्त हो चुका पासपोर्ट संबंधित वरिष्ठ डाक अधीक्षक या डाक अधीक्षक के पास जमा कर देंगे।

किन लोगों पर लागू होगा नया नियम?

गृह मंत्रालय का यह नया प्रावधान उन लोगों पर लागू होगा जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय से संबंध रखते हैं और भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रहे हैं।

यह संशोधन नागरिकता नियमों के शेड्यूल IC के बाद जोड़ा गया है, जो विशेष रूप से इन तीन देशों से आए गैर-मुस्लिम प्रवासियों से संबंधित है।

CAA के तहत मिलती है नागरिकता

दरअसल, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-दस्तावेजी गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था।

इस कानून के तहत वे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग भारतीय नागरिकता के पात्र हैं, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके हैं।

सरकार का क्या है उद्देश्य?

सरकार का मानना है कि नए नियम से नागरिकता प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवेदकों की पहचान तथा दस्तावेजों का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पासपोर्ट संबंधी घोषणा अनिवार्य होने से नागरिकता प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन और निगरानी को भी मजबूती मिलेगी।