
LLB correspondence: सुप्रीम कोर्ट इस कानूनी बिंदु पर विचार के लिए सहमत हो गया है कि क्या पत्राचार (कॉरेस्पोंडेंस ) से कानून की डिग्री हासिल करने वाले व्यक्ति को वकील के रूप में नामांकन से वंचित किया जा सकता है? जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने इस मुद्दे पर बार काउंसिल ऑफ तेलंगाना के साथ-साथ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। बेंच तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एसटीएस ग्लेडिस की अपील की सुनवाई कर रही है। ग्लेडिस की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा था कि पत्राचार (कॉरेस्पोंडेंस) के माध्यम से विधि स्नातक की डिग्री लेने के कारण उन्हें वकील के रूप में नामांकित नहीं किया जा सकता।
खंडपीठ ने कहा, "नोटिस जारी करें, जिसका चार सप्ताह के भीतर जवाब दिया जाए। इसके अलावा, दस्ती सेवा की अनुमति है।" हाईकोर्ट के समक्ष लॉ ग्रेजुएट ने तेलंगाना बार काउंसिल को (1) एडवोकेट एक्ट, 1961 के तहत याचिकाकर्ता को वकील के रूप में नामांकित करने; (2) नामांकन के लिए याचिकाकर्ता से ली गई 28,000/- रुपये की राशि वापस करने और उसे 750/- रुपये की कम फीस पर नामांकित करने का निर्देश देने की मांग की; (3) याचिकाकर्ता को 24 नवंबर 2024 को होने वाली AIBE XIX परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।
हाईकोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल की दलील को स्वीकार करते हुए रिट याचिका खारिज की, जिसने पीठ को सूचित किया कि चूंकि याचिकाकर्ता ने 2012 में पत्राचार के माध्यम से बीए में ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त की थी, इसलिए वह एम. नवीन कुमार बनाम तेलंगाना राज्य में हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार नामांकन की हकदार नहीं होगी।
Updated on:
18 Dec 2024 07:49 am
Published on:
18 Dec 2024 07:46 am
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