8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Raksha Bandhan: साल 1905 का रक्षाबंधन… रवींद्रनाथ टैगोर ने कर दिया था कुछ ऐसा, जिसकी आज भी मिसाल देते हैं लोग

रक्षाबंधन से जुड़ी एक कहानी हिंदू-मुस्लिम एकता की है। अंग्रेजों के शासनकाल में उन्होंने धर्मों के बीच दूरी पैदा की, लेकिन रक्षाबंधन जैसी परंपराओं ने लोगों को एकजुट करने का काम किया और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Aug 08, 2025

Play video

रक्षाबंधन का त्योहर। (फोटो- AI)

इस साल 9 अगस्त यानी कि शनिवार को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन के साथ ही सावन महीने की विदाई हो जाएगी और भादो मास शुरू हो जायेगा। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं।

अंग्रेजों की नीति ने बढ़ाई दूरी

रक्षा बंधन से जुड़ीं भारत में अनेकों ऐसी कहानियां हैं, जिन्हें कभी भूला नहीं जा सकता है। एक कहानी हिंदू-मुस्लिम धार्मिक एकता से भी जुड़ी है। बताया जाता है कि जब भारत में अग्रेजों का शासन था। तब वे देश पर राज करने के लिए अलग-अलग धर्मों और समुदायों को एक दूसरे से लड़ाया करते थे।

इसी को तब डिवाइड एन्ड रूल नाम भी दिया गया था। जिसकी चर्चा आज भी हर जुबान पर होती है। उस समय देश पर राज करने के लिए अंग्रेजों ने हिन्दुओं और मुसलमान के बीच बड़े पैमाने पर दूरी पैदा कर दी थी।

हिंदू-मुसलमान की एकता बन गई मिसाल

एक समय तो ऐसा भी आया, जब दोनों एक दूसरे को देखना तक नहीं चाहते थे। इस बीच, रक्षाबंधन का त्योहार आया और उस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि हिंदू-मुसलमान की एकता हेमशा के लिए एक मिसाल बन गई।

बात साल 1905 की है। उस वक्त, बंगाल का क्षेत्रफल काफी बड़ा हुआ करता था। इसमें पश्चिम बंगाल के साथ बिहार, ओडिशा, असम और बांग्लादेश भी जुड़े थे। तब अंग्रेजी हुकूमत ने बंगाल को दो हिस्सों में विभाजित करने का फैसला किया था। ताकि उनका संचालन करने में आसानी हो।

अंग्रेजी हुकूमत के इस फरमान के खिलाफ खूब विरोध हुआ। हालांकि, तब भी लोग विभाजन को रोकने में नाकाम रहे। 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल का बंटवारा हो गया। उस दिन, रक्षाबंधन का त्योहार भी था।

हिंदू-मुस्लिम समुदाय से टैगोर ने की अपील

अब विभाजन के बाद गुरु रवींद्रनाथ टैगोर हिंदू-मुस्लिम एकता को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं देना चाहते थे। इस वजह से, उन्होंने इसी दिन हिंदू और मुस्लिम को एक करने के लिए भव्य जुलूस निकाला था। सभी समुदाय के लोगों से एक दूसरे को राखी बांधने की अपील की थी।

दोनों समुदाय ने इस जुलूस में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इसमें शामिल सभी भाइयों का महिलाएं ने भव्य तरीके से स्वागत किया था। तब महज राखी के एक धागे ने हिंदू-मुस्लिम को एकजुट करने का काम किया।

बंगाल में तमाम जगहों पर हिंदू धर्म के लोग मुस्लिम समाज के लोगों को राखी बांध रहे थे। वहीं, मुस्लिम धर्म के लोग भी इस दौरान देश में एकता का परिचय देने से पीछे नहीं हटे।

उन्होंने भी हिंदू भाइयों को राखी बांधी। हर तरह, खुशियों का माहौल था। रक्षाबंधन के त्योहार पर आज भी हिंदू-मुस्लिम की उस एकता का उदाहरण दिया जाता है।