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CBI की बड़ी कार्रवाई, 23 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट के केस में चार्जशीट दाखिल

CBI ने 23 करोड़ की साइबर ठगी मामले में सिलीगुड़ी के आरोपी साग्निक रॉय और उसकी कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। फर्जी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर वीडियो कॉल और कानूनी नोटिस से डराकर वरिष्ठ नागरिक से पैसे ऐंठे गए।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 10, 2026

CBI की बड़ी कार्रवाई (IANS)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बहुचर्चित डिजिटल अरेस्ट साइबर धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सिलीगुड़ी के एक आरोपी और उसकी कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह मामला दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक से करीब 23 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़ा है, जिसने देशभर में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

फर्जी कानूनी नोटिस और वीडियो कॉल के जरिए ठगी

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह केस सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI को सौंपा गया था। जांच में सामने आया कि यह एक अत्यंत सुनियोजित और जटिल साइबर फ्रॉड था, जिसमें पीड़ित को फर्जी कानूनी नोटिस और वीडियो कॉल के जरिए डराकर ठगी को अंजाम दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

CBI ने आरोपी की पहचान साग्निक रॉय के रूप में की है, जिसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच में ‘Securing World Social and Economic Development Council’ नाम की कंपनी का भी खुलासा हुआ, जिसका कथित तौर पर इस्तेमाल फर्जी वित्तीय लेन-देन के लिए किया गया।

डर दिखाकर लूटे पैसे

एजेंसी के मुताबिक, आरोपी और उसकी कंपनी के बैंक खातों का उपयोग ठगी की गई रकम को प्राप्त करने के लिए किया गया। पीड़ित को तथाकथित डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों द्वारा अपनाया गया एक नया और खतरनाक तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या न्यायिक अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर कानूनी जांच या गिरफ्तारी के दायरे में है। डर और दबाव की स्थिति में पीड़ित जल्दबाजी में बड़ी रकम ट्रांसफर कर देता है, जिससे अपराधी आसानी से ठगी को अंजाम दे देते हैं।

जांच में क्या खुलासा हुआ?

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा इस्तेमाल किया गया बैंक खाता देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज कम से कम दो अन्य साइबर फ्रॉड मामलों से भी जुड़ा हुआ है। इस खाते के जरिए अवैध धन को ‘म्यूल अकाउंट्स’ के नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर कर उसकी असली पहचान छिपाई जाती थी।

CBI की चेतावनी और सलाह

CBI ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया भारत में मौजूद नहीं है। एजेंसी ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे कॉल या संदेशों से घबराएं नहीं और किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।

कैसे रहें सुरक्षित?

अनजान कॉल करने वालों के साथ व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
किसी भी कानूनी दावे की पुष्टि संबंधित सरकारी एजेंसी से करें।
वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहें।
संदिग्ध लिंक या निवेश योजनाओं से बचें।

शिकायत कहां करें?

अगर आपको किसी साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें। समय पर की गई शिकायत से ऐसे अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

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