
सीडीएस ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर का भारत की कमांड संरचना पर ऐसा कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा (Fhoto Credit- IANS)
ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindhu) में हार के बाद पाकिस्तान को अपने सैन्य और संवैधानिक ढांचे में बड़े बदलाव करने पड़े। इस बात का खुलासा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने किया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान के पक्ष में नहीं गया, जिसका अप्रत्यक्ष संकेत उसके बाद किए गए सैन्य पुनर्गठन और संवैधानिक संशोधन हैं।
पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 में बोलते हुए सीडीएस ने बताया कि पाकिस्तान ने ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद समाप्त कर उसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद बनाया। साथ ही नेशनल स्ट्रैटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड की स्थापना की गई।
उन्होंने कहा कि इससे जमीन, संयुक्त और रणनीतिक सैन्य शक्तियां एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित हो गई हैं, जो एकीकृत सैन्य सिद्धांत के खिलाफ है और भविष्य में आंतरिक चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
सीडीएस ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर का भारत की कमांड संरचना पर ऐसा कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा। भारत में निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक निर्णायक बन रही है और भविष्य के संघर्षों में संपर्क रहित व गैर-घातक साधनों की भूमिका बढ़ेगी। उन्होंने डोकलाम, गलवान और बालाकोट जैसे अभियानों से मिले सबक का भी उल्लेख किया।
Published on:
11 Jan 2026 02:28 am
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