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केंद्र सरकार 'नक्सलमुक्त भारत' अभियान की सफलता के बाद अब ‘नशामुक्त भारत’ मिशन के तहत मादक पदार्थों की तस्करी और ड्रग कार्टेल्स को पूरी तरह खत्म करने की बड़ी तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) तथा अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियां मिलकर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ड्रग सिंडिकेट्स पर सख्त शिकंजा कसने जा रही हैं।
सरकार का फोकस मुख्य रूप से भारत के बाहर से आने वाली मादक पदार्थों की तस्करी रोकने पर है। इसके लिए डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही देश के अंदर आंतरिक डिलीवरी नेटवर्क और छोटे-बड़े गिरोहों की गतिविधियों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार मैक्सिको और कनाडा की तर्ज पर सक्रिय हो रहे ड्रग कार्टेल्स को निशाना बनाएगी।
गृह मंत्रालय ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर और पंजाब की उच्चस्तरीय बैठकों में ड्रोन से हो रही तस्करी रोकने के प्रभावी उपायों पर जोर दिया। मध्य प्रदेश में आयोजित जिला सुरक्षा समिति (JCC) की बैठक में NCB ने ड्रग सिंडिकेट, अवैध ड्रग लैबोरेटरीज और सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल के बयानों में स्पष्ट किया है कि सरकार न सिर्फ छोटे ड्रग पेडलर्स बल्कि बड़े कार्टेल्स को भी बेरहमी से तोड़ रही है।
साल 2026 की पहली तिमाही में NCB ने 73 तस्करों पर कार्रवाई की है। इन तस्करों पर दोष सिद्ध हो चुका है। यह अभियान युवाओं को नशे की लत से बचाने और 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को साकार करने का हिस्सा है। NCB-CBI की संयुक्त टीमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। कई बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स को ध्वस्त किया जा चुका है, जिनमें एन्क्रिप्टेड ऐप्स और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल करने वाले गिरोह शामिल हैं।
भारत में ड्रग्स की सप्लाई मुख्यतया 3 बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी है, जो भारत में माल पहुंचा कर स्थानीय गिरोहों के माध्यम से ग्राहक तक डिलीवरी करते हैं।
1- डेथ क्रिसेंट नेटवर्क: इसके जरिए अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रास्ते भारत में हेरोइन की सप्लाई होती है। ड्रोन, समुद्री मार्ग, नदी-नाले, थार मरुस्थल के जरिये भारत में मादक पदार्थ भेजे जाते हैं। गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू कश्मीर में ड्रोन ड्रॉप से तस्करी होती है।
2- डेथ ट्राइंगल नेटवर्क: म्यांमार-लाओस-थाईलैंड के जरिए सिंथेटिक ड्रग्स भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचाता है। जंगल के रास्तों से म्यांमार से खुली तस्करी, मणिपुर में स्थानीय स्तर पर संरक्षित खेती से भी तस्करी के तार जुड़े हैं।
3- अफ्रीकी सिंडिकेट नेटवर्क: मुंबई, दिल्ली, बेंगलूरु जैसे मेट्रो शहरों में हाईप्रोफाइल ग्राहकों की सप्लाई के लिए समुद्री मार्ग या एयर कार्गो के जरिए माल पहुंचाया जाता है।
Published on:
28 Apr 2026 03:43 am
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