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Chandrayaan-3: ISRO चीफ का सामने आया बड़ा बयान, रोवर प्रज्ञान और मिशन सूर्य को लेकर दी अहम जानकारी

Chandrayaan-3 Mission: चंद्रयान की सफल लैंडिंग के बाद पहली बार इसरो चीफ ए सोमनाथ का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारत की इस सफलता पर बधाई दी है, साथ चांद की सतह रोवर प्रज्ञान कैसे काम करेगा इसके बारे में जानकारी साझा की है।

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Chandrayaan-3 Mission

Chandrayaan-3 Mission

Chandrayaan-3 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO ने बुधवार शाम 6: 04 बजे मिशन मून यानी चंद्रयान-3 को चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड कराते हुए एक कीर्तिमान स्थापित कर दिया। भारत चांद के दक्षिणी ध्रुप पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। चंद्रयान की सफल लैंडिंग के बाद पहली बार इसरो चीफ ए सोमनाथ का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारत की इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी है, साथ चांद की सतह रोवर प्रज्ञान कैसे काम करेगा इसके बारे में जानकारी साझा की है।

मन पर क्या बीती इसका वर्णन करना कठिन

इसरो प्रमुख ने चंद्रयान -3 सफलता पर योगदान देने वालों को धन्यवाद देते हुए कहा, “ मन पर क्या बीती, इसका वर्णन करना बहुत कठिन है। यह खुशी हो सकती है, यह उपलब्धि का सार हो सकता है और योगदान देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद देना हो सकता है।”

लैंडिंग के लिए साउथ पोल ही क्यों ?

इसरो प्रमुख ए सोमनाथ ने सामाचार एजेंसी को बताया कि क्यों चंद्रयान-3 की लैंडिंग के लिए साउथ पोल को ही चुना गया। उन्होंने कहा, “हम दक्षिणी ध्रुव के करीब चले गए जो लगभग 70 डिग्री है। सूर्य द्वारा कम प्रकाशित होने के संबंध में दक्षिणी ध्रुव को एक विशिष्ट लाभ है... चंद्रमा पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने दक्षिणी ध्रुव में बहुत रुचि दिखाई क्योंकि अंततः मनुष्य वहां जाकर उपनिवेश बनाना चाहते हैं और फिर उससे आगे की यात्रा करना चाहते हैं। इसलिए हम सबसे अच्छी जगह की तलाश कर रहे हैं और दक्षिणी ध्रुव में वह क्षमता है।
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सूर्य के लिए जल्द लॉन्च होगा मिशन आदित्य

इसरो चीफ ने मिशन आदित्य और गगनयान के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “ सूर्य के लिए आदित्य मिशन सितंबर में लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। गगनयान पर अभी भी काम चल रहा है। हम क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए संभवतः सितंबर या अक्टूबर के अंत तक एक मिशन करेंगे, जब तक कि हम संभवतः 2025 तक पहला मानव मिशन नहीं कर लेते तब तक कई मिशन होंगे।
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