
छत्तीसगढ़ कोर्ट ने महिलाओं के जींस पहनने पर आपत्ति करने वालों पर की सख्त टिप्पणी
हाल ही में छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस अग्रवाल की पीठ ने बच्चे की कस्टडी को लेकर दायर एक याचिका पर अहम टिप्पणी की है। इस टिप्पणी में कहा गया कि किसी महिला का चरित्र उसके जींस और टीशर्ट पहनने या पुरुष साथियों के साथ नौकरी के मकसद में बाहर जाने से तय नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने कहा, "ऐसी सोच रखने से महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकार को लेकर जारी लड़ाई लंबी हो जाएगी। शुतुरमुर्ग की भांति विचारधारा रखने वाले समाज के कुछ लोगों के प्रमाण-पत्र से महिला का चरित्र तय नहीं कर सकते हैं।"
इस मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने मां को बच्चे की कस्टडी दे दी। साल 2007 में महासमुंद जिले में रहने वाले कपल की शादी हुई थी, मगर दो साल बाद दोनों ने आपसी मंजूरी से तलाक ले लिया। इस दौरान इस बात पर सहमति बनी की बेटा अपनी मां के पास रहेगा।
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तलाक के बाद महिला जिले में ही एक प्राइवेट कंपनी में कार्यालय सहायक पद पर नौकरी करने लगी। पांच साल बाद महिला का पूर्व पति ने फैमिली कोर्ट में मामला पेश करके अपने बेटे की कस्टडी की मांगी की। उसने अदालत में यह तर्क दिया कि उसकी पूर्व पत्नी अपने पुरुष साथियों के साथ जींस और टीशर्ट पहनकर बाहर जाती है, इस कारण उसने अपनी पवित्रता को खो दी है। ऐसी मां के साथ रहने से उसके बच्चे पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही उसने अपनी पूर्व पत्नी कंपनी के प्रोपाइटर के साथ अवैध संबंध होने के संगीन आरोप लगाए।
अब हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए मां को बच्चे की कस्टडी सौंपने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा पिता को बच्चे से मिलने-जुलने की छूट दी है। हाइकोर्ट का कहना है कि बच्चे को मां और पिता दोनों का प्यार पाने का हक है।
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Updated on:
07 Apr 2022 06:47 am
Published on:
06 Apr 2022 06:33 pm

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